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Tuesday, April 28, 2026
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अफ्रीका को समर्थन, भारत पर चुप्पी… चीन ने सुरक्षा परिषद में सुधारों पर दिखाया दोमुंहापन, जानें क्या कहा

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न्यूयॉर्क

चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को लेकर एक बार फिर अपना दोहरा रवैया दिखाया है। चीन ने अफ्रीकी देशों के लिए विशेष व्यवस्था के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों का समर्थन किया, लेकिन भारत को लेकर बीजिंग ने चुप्पी साध ली। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों के मार्ग को आगे बढ़ाना आवश्यक है, जो अफ्रीका के लिए विशेष व्यवस्था को प्राथमिकता देता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों पर 10 राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों की अफ्रीकी संघ समिति (C10) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के विदेश मंत्रियों के बीच बैठक के दौरान वांग ने कहा, ‘वर्तमान में सुरक्षा परिषद में पर्याप्त अफ्रीकी प्रतिनिधित्व का अभाव है, जो इसे अन्यायपूर्ण बनाता है।’

अफ्रीका के लिए दोहराया समर्थन
चीनी विदेश मंत्री ने अफ्रीका के लिए बीजिंग के समर्थन को दोहराया और कहा कि चीन यूएनएससी सुधार प्रक्रिया में अफ्रीका की मांगों को संबोधित करने वाली विशेष व्यवस्था की वकालत करने वाले पहले देशों में से एक था। उन्होंने कहा कि ‘परिषद के अधिकार और दक्षता को बढ़ाने के लिए यूएनएससी को अफ्रीकी देशों विशेष रूप से छोटे और मध्यम आकार के देशों समेत विकासशील देशों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।’

वांग ने विकासशील देशों, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण में प्रतिनिधित्व और आवाज बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया, लेकिन भारत को लेकर एक बार फिर चुप्पी बनाए रखी। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में अपने लिए उचित स्थान मांग रहा है। चीन को छोड़कर सुरक्षा परिषद के बाकी चार सदस्य अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस भारत की मांग का समर्थन करते हैं।

रूस ने किया भारत का समर्थन
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र को संबोधित करते हुए भारत की स्थायी सदस्यता समर्थन किया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष विश्व व्यवस्था के लिए सुरक्षा परिषद में ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधित्व के विस्तार की जरूरत है। रूस ने सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील को स्थायी सदस्यता देने का समर्थन किया, लेकिन किसी नए पश्चिमी देश को स्थायी सीट देने का कड़ा विरोध किया। रूस के अलावा हाल ही में अमेरिका, फ्रांस, भूटान, पुर्तगान और चिली ने भारत को सदस्यता दिए जाने का समर्थन किया है।

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