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वन नेशन-वन इलेक्शन पर तीन बिल लाएगी सरकार, इनमें से दो संविधान संशोधन बिल होंगे

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नई दिल्ली,

एक देश एक चुनाव को लेकर सरकार संसद में बिल लाने की तैयारी में है. सूत्रों के हवाले से ये खबर सामने आई है. सरकार के सूत्रों के मुताबिक सरकार तीन बिल लाएगी, जिसमें दो संविधान संशोधन बिल होंगें. हालांकि, ये अभी तय नहीं है कि ये बिल सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में लाएगी या बजट में सत्र में. इसको लेकर जल्द ही सरकार के स्तर पर फैसला लिया जाएगा.

गौरतलब है कि मोदी कैबिनेट ने एक देश एक चुनाव पर बनी रामनाथ कोविंद समिति की सिफ़ारिशों को स्वीकार कर लिया था. समिति की रिपोर्ट में दो चरणों में चुनाव की सिफ़ारिश की गई है. पहले चरण में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव कराने की सिफारिश समिति ने की है. वही दूसरे चरण में स्थानीय निकाय के चुनाव कराए जाने की सिफ़ारिश की गई है.

बता दें कि वन नेशन वन इलेक्शन पर विचार करने के लिए मोदी सरकार ने पिछले साल सितंबर में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था. कमेटी ने इस साल मार्च में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 18 हजार 626 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में ये प्रस्ताव दिया गया था.

1. सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 तक बढ़ाया जाए.
2. बहुमत नहीं मिलता है और अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाता है तो बाकी 5 साल के कार्यकाल के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं.
3. पहले फेज में लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं.
4. 100 दिनों के भीतर दूसरा फेज होगा, जिसमें शहरी और ग्रामीण निकाय चुनाव कराए जाएंगे.
5. सभी चुनावों के लिए कॉमन इलेक्टोरल रोल तैयार किय़ा जाएगा.
6. एक साथ चुनाव कराने के लिए उपकरणों, जनशक्ति और सुरक्षा बलों की एडवांस प्लानिंग की सिफारिश की है.

‘वन नेशन वन इलेक्शन’ को लागू करने में चुनौतियां
मोदी 3.0 के 100 दिन पूरे हुए तो सरकार का तूफानी स्टैंड आ गया. अब वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर सरकार की कोशिशें अपनी जगह हैं और विपक्ष के सवाल अपनी जगह. इसमें कोई शक नहीं कि वन नेशन वन इलेक्शन को लागू करने में चुनौतियां हैं, लेकिन ऐसी कोई चुनौती नहीं जिसे देश के फायदे के लिए मात नहीं दी जा सके.

62 सियासी दलों से ली गई राय
समिति ने एक देश-एक चुनाव पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए 62 सियासी दलों से राय ली थी. इन राजनीतिक दलों में से 32 ने समर्थन, 15 ने विरोध और 15 ने इस पर जवाब देने से इनकार कर दिया था. जेडीयू ने जहां बिल का समर्थन किया है, तो वहीं चंद्रबाबू नायडू की पार्टी ने मामले में अपनी राय नहीं दी है. इतना ही नहीं मायावती ने इसका समर्थन किया है.

 

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