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‘दिल्ली को दिलाएंगे LG से मुक्ति’… केजरीवाल के दावे में कितना दम, कैसे खत्म हो सकता है उपराज्यपाल

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नई दिल्ली

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने रविवार को ‘जनता की अदालत’ कार्यक्रम में केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। इस दौरान केजरीवाल ने दिल्ली की जनता के सामने बहुत बड़ा दावा ठोक दिया। केजरीवाल ने अपनी स्पीच में कहा, ‘आज दिल्ली में जनतंत्र की जगह LG (उपराज्यपाल) का राज आ गया है। LG दिल्ली की जनता के खिलाफ निर्णय ले रहे हैं। आज मैं कसम खा रहा हूं कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाएंगे और दिल्ली को LG से मुक्ति दिलाकर ही रहेंगे।’

अरविंद केजरीवाल ने भले ही जोश में आकर दिल्ली को एलजी मुक्त कराने का दावा जनता के आगे कर दिया हो। लेकिन दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना और दिल्ली से एलजी की शक्तियों को समाप्त करना इतना आसान नहीं है। इसमें केंद्र सरकार और राष्ट्रपति का रोल सबसे ज्यादा अहम है। दरअसल दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है। यहां संविधान के तहत एलजी की तैनाती की गई है। एलजी का पद केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच समन्वय का कार्य करता है। यह पद काफी अहम है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच हमेशा कामों के बंटवारों को लेकर संघर्ष रहता है। केजरीवाल सरकार दिल्ली में चुनाव से पहले प्रचार करती रही है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना इनकी प्राथमिकता है।

दिल्ली में प्रशासन की मौजूदा स्थिति समझिए
संविधान के अनुच्छेद 239AA के तहत दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है। इसे 1992 में 69वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा शामिल किया गया था। इसके तहत कई प्रावधान हैं-

  • दिल्ली की अपनी 70 सीटों वाली विधानसभा है जिसका मुखिया मुख्यमंत्री होता है।
  • प्रशासक उपराज्यपाल होते हैं और राष्ट्रपति की ओर से काम करते हैं।
  • दिल्ली विधान सभा को राज्य सूची और समवर्ती सूची पर कानून बनाने का अधिकार है लेकिन ‘जन, जमीन और पुलिस’ पर दिल्ली विधानसभा कानून नहीं बना सकती। यह पूरी तरह से केंद्र का अधिकार क्षेत्र है।
  • उपराज्यपाल (LG), मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल की सलाह से फैसला करेंगे हालांकि यह कहीं नहीं लिखा है कि LG, सलाह मानने को बाध्य है।
  • जिस मुद्दे पर उपराज्यपाल और मंत्रियों के बीच किसी तरह का मतभेद पैदा होता है तो उपराज्यपाल इस मामले को राष्ट्रपति के पास भेज सकता है और उसी का निर्णय अंतिम होगा।
  • अगर कोई मामला बहुत अर्जेंट है तो ऐसे मामलों में उपराज्यपाल को यह अधिकार है कि वह अपने विवेक से निर्णय ले सकते हैं।

पूर्ण राज्‍य का दर्जा क्‍यों नहीं ?
नेशनल कैपिटल टैरिटरी होने के साथ दिल्‍ली देश की राजधानी भी है। देश की राजधानी होने के कारण यहां पर कई तरह के अंतरराष्‍ट्रीय प्रोटोकॉल भी लागू हैं। ऐसा माना जाता है कि ऐसी स्थिति में अगर दिल्‍ली को पूर्ण राज्‍य का दर्जा मिल गया तो देश की राजधानी में केंद्र और राज्‍य सरकार में टकराव की स्थिति होने पर हालात बेहद खराब हो सकते हैं।

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