अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग की चिंगारी अब भारत के आम जनजीवन को झुलसाने लगी है। खाड़ी देशों से गैस आयात का मुख्य मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ बंद होने की खबरों ने देशभर में एलपीजी (LPG) की भारी किल्लत पैदा कर दी है। आपूर्ति श्रृंखला टूटने की आशंका और अफवाहों के कारण पूरे देश में ‘पैनिक बुकिंग’ का दौर शुरू हो गया है, जिससे गैस एजेंसियों के बाहर युद्ध जैसी स्थितियां बन रही हैं। आलम यह है कि जो कॉमर्शियल सिलेंडर ₹2000 में मिलता था, उसकी कालाबाजारी ₹4000 तक पहुंच गई है। सरकार के तमाम दावों के बावजूद जनता में डर व्याप्त है कि आने वाले दिनों में चूल्हे जलना मुश्किल हो जाएंगे। मध्य प्रदेश: ऑनलाइन बुकिंग ठप, इंडक्शन की बिक्री 7 गुना बढ़ी मध्य प्रदेश में हालात बदतर होते जा रहे हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली सर्वर डाउन होने की वजह से पूरी तरह ठप पड़ गई है।
प्रदेश में गैस की वेटिंग लिस्ट 8 दिन तक बढ़ गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं का धैर्य जवाब दे रहा है। राजधानी भोपाल में गैस न मिलने के कारण इंडक्शन चूल्हों की मांग में 7 गुना इजाफा हुआ है और इनकी कीमतें भी रातों-रात दोगुनी हो गई हैं। भोपाल होटल एसोसिएशन के अनुसार, करीब 2000 होटल और रेस्टोरेंट को पिछले 4 दिनों से एक भी कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिला है, जिससे हजारों परिवारों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान: उद्योगों पर ताले और राजनीतिक उबाल उत्तर प्रदेश में गैस संकट ने औद्योगिक पहिये को थाम दिया है। बुलंदशहर में स्थित एशिया के सबसे बड़े पॉटरी उद्योग की 95% यूनिट्स बंद हो गई हैं, जिससे लगभग 30 हजार श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। फिरोजाबाद का चूड़ी उद्योग और आगरा का पेठा उद्योग भी गैस की कमी के कारण दम तोड़ रहा है। वहीं राजस्थान में यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप ले चुका है। जयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर की ‘शवयात्रा’ निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। कोटा के हॉस्टल मेस और ढाबों में अब गैस की जगह लकड़ी और कोयले का धुआं उठ रहा है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय है।
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