नई दिल्ली:
दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को आधिकारिक तौर पर 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित सिविल लाइंस आवास आवंटित किया गया है. दो दिन पहले कथित तौर पर उन्हें जबरन बंगला खाली करने के लिए कहा गया था. लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा जारी एक प्रस्ताव पत्र में कहा गया है कि सिविल लाइंस स्थित बंगला औपचारिक रूप से आतिशी को आवंटित कर दिया गया है, इसके लिए उन्हें हैंडओवर करने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है.
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा बंगला खाली करने के बाद से यह आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी और एलजी कार्यालय के बीच तीखी खींचतान का केंद्र बना हुआ था.
पीडब्ल्यूडी के उप सचिव (आवंटन) की ओर से जारी एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि सीएम आतिशी को पीडब्ल्यूडी जनरल पूल बंगला आवंटित किया गया है. पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री को अधिसूचना जारी होने के 8 दिन के भीतर बंगले की स्वीकृति प्रस्तुत करनी होगी, जबकि आतिशी को सिविल लाइंस स्थित आधिकारिक आवास पर कब्जा लेने के 15 दिनों के भीतर वर्तमान में जिस आवास में वह रह रही हैं, उसे खाली करना होगा.
ये शर्त रखी गई
आतिशी को बंगला आवंटित करते समय रखी गई शर्तों में कहा गया है कि उक्त आवास विभिन्न उल्लंघनों के लिए सीबीआई/अन्य एजेंसियों द्वारा जांच के अधीन है, इसलिए जरूरत पड़ने पर आवंटी को जांच में पूर्ण सहयोग देने की सलाह दी जाती है. सिविल लाइंस बंगला कथित भ्रष्टाचार मामले के साथ-साथ आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पर कथित हमले के मामले में जांच एजेंसियों की जांच के घेरे में है.
हैंडओवर विवाद के बाद विभाग ने जड़ा था ताला
बता दें कि PWD ने हाल ही में इस बंगले को सील कर दिया था. दरअसल, अरविंद केजरीवाल द्वारा सीएम पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद इस सरकारी आवास को खाली किया गया था. वहीं आतिशी सीएम बनने के बाद इसमें शिफ्ट हुई थीं. आवास को खाली करने और हैंडओवर को लेकर ही विवाद था. लिहाजा विभाग ने बंगले के गेट पर डबल लॉक लगा दिया था. दिल्ली के विजिलेंस डिपार्टमेंट में पीडब्ल्यूडी के दो सेक्शन ऑफिसर और अरविंद केजरीवाल के पूर्व स्पेशल सेक्रेटरी को तरीके से हैंडओवर लेने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था.
आतिशी ने तस्वीर जारी कर साधा था बीजेपी पर निशाना
इसी बीच सीएम आतिशी ने एक तस्वीर जारी की थी, इसमें सीएम आतिशी पैक किए गए सामान के बीच एक फाइल पर हस्ताक्षर करते हुए दिख रही थीं. तस्वीर में नजर आ रहा है कि कमरे में सामान से भरे कार्टन रखे थे.
अपने घर पर फाइल पर हस्ताक्षर करती हुईं सीएम आतिशी
इसके जरिए आतिशी ने बीजेपी पर निशाना साधा था. आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि सीएम आतिशी को उनके बंगले से जबरन निकलवा दिया गया, वहीं बीजेपी ने कहा कि आतिशी ने बंगले में जाने के लिए नियमों का पालन नहीं किया.
नए CM को बंगले के लिए करना पड़ता है आवेदन
दिल्ली पूर्व मुख्य सचिव आलोक सहगल के मुताबिक उपराज्यपाल के आधिकारिक आवास ‘राज निवास’ को छोड़कर दिल्ली में किसी भी विधायक के लिए कोई भी आधिकारिक आवास निर्धारित नहीं है. सहगल ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में बताया कि जब कोई नया मंत्री पदभार ग्रहण करता है तो बंगले पुनः आवंटित किये जाते हैं. इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुख्यमंत्री, मंत्री या विधायक पद से हटने के बाद जो बंगला छोड़ता है, उसकी जगह लेने वाले व्यक्ति को वही पुराना आवास आवंटित हो. सरकारी बंगले के आवंटन के लिए प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री, जैसे शीला दीक्षित और मदन लाल खुराना भी अलग-अलग बंगलों में रहे थे.
प्रक्रिया का पालन किए बिना आवास में रहना अवैध
उन्होंने बताया कि आवास आवंटित करने की प्रक्रिया में कई चरण शामिल हैं, जिसमें उचित आदेश और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों जैसे अवर सचिव या उप सचिव द्वारा औपचारिक प्रमाणीकरण शामिल है. चाहे मुख्यमंत्री ही क्यों न हो, किसी सरकारी बंगले में रहने के लिए उसे पीडब्ल्यूडी से मंजूरी लेनी पड़ती है. उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना, सरकारी आवास में रहना अवैध है. उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी नियमों के तहत कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सरकारी आवास नहीं रख सकता है. दिल्ली सीएम को उस आवास के लिए आवेदन करना होता है जिसमें वह रहना चाहते या चाहती हैं. बंगला या तो सेंट्रल पूल या सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) पूल का होता है या आवेदन के बाद रिक्तता के आधार पर आवंटित किया जाता है.
सीएम पद छोड़ने वाले को खाली करना पड़ता है घर
जब कोई सीएम इस्तीफा दे देता है, तो उसे उचित अवधि के भीतर आवंटित घर खाली करना होता है, जो लगभग दो-तीन सप्ताह होता है. तय समय में बंगला खाली नहीं करने पर हर्जाना भरना पड़ता है. सेंट्रल पूल और जीएडी पूल के बंगलों के लिए नियम एक समान हैं. जानकारी के अनुसार, PWD ने इस बंगले को सील कर दिया है और दिल्ली के विजिलेंस डिपार्टमेंट ने PWD के दो सेक्शन ऑफिसर और दिल्ली के मुख्यमंत्री के स्पेशल सेक्रेटरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इस मामले पर एलजी हाउस के सूत्रों का कहना है कि पहले इस बंगले की इन्वेंट्री तैयार की जाएगी और उसके बाद ही आवंटित किया जाएगा.
