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बीच में बोलने लगे TMC सांसद, बीजेपी नेता ने टोका तो कांच की बोतल पटकी… जानें JPC की बैठक में कैसे हुई झड़प

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नई दिल्ली,

वक्फ बिल को लेकर मंगलवार हो हुई जेपीसी की बैठक में हंगामा हो गया. देखते ही देखते टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और बीजेपी सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय के पीछ तीखी नोकझोंक हो गई. बात इतनी बढ़ गई कि कल्याण बनर्जी ने टेबल पर रखी कांच की पानी की बोतल फोड़ दी. इससे उनके हाथ में गंभीर चोट लग गई. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए ले जाया गया, जहां उनके हाथ में चार टांके आए.

मीटिंग के दौरान हंगामा करने को लेकर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को वक्फ पर संसदीय समिति से एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया. जेपीसी चेयरमैन जगदंबिका पाल के नेतृत्व में रूल 374 के तहत वोटिंग हुई. इसमें कल्याण बनर्जी को सस्पेंड करने को लेकर पक्ष में 9 और विपक्ष में 7 वोट पड़े. सत्ता पक्ष के सदस्य बनर्जी को जेपीसी से ही सस्पेंड करने के पक्ष में थे. लेकिन बातचीत के बाद एक दिन के लिए सस्पेंड करने का फैसला हुआ. अगली बैठक अब 28 और 29 नवंबर को होगी. इस दौरान भी वक्फ संशोधन विधेयक पर व्यापक विचार-विमर्श जारी रहेगा.

बैठक में कैसे शुरू हुआ हंगामा?
अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कल्याण बनर्जी इतना बढ़ गए और उन्होंने बोतल फोड़ दी. दरअसल, सूत्रों का कहना है कि वक्फ बोर्ड की जेपीसी बैठक में जिस समय हंगामा हुआ तब ओडिशा पर प्रेजेंटेशन चल रही थी. बैठक में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं. इस दौरान कल्याण बनर्जी बिना बारी के अपनी बात रखना चाहते थे. उनसे पहले ही तीन बार बात की जा चुकी थी और वह प्रेजेंटेशन के दौरान दोबारा मौका पाना चाहते थे. बीजेपी सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय ने इस पर आपत्ति जताई.

सूत्रों ने बताया कि कल्याण बनर्जी ने अभिजीत गंगोपाध्याय के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. हालांकि दावा है कि दोनों तरफ से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया. इसके बाद दोनों में तीखी बहस शुरू हो गई और टीएमसी सांसद ने कांच की बोतल मेज पर पटक दी, जिससे वे चोटिल हो गए. इसके बाद आप सांसद संजय सिंह और AIMIM सांसद ओवैसी चोटिल कल्याण बनर्जी को इलाज के लिए लेकर गए, जहां उनके हाथ में 4 टांके लगे हैं.

वक्फ संशोधन विधेयक पर आपत्तियों के लिए बनी है जेपीसी
बता दें कि वक्फ संशोधन विधेयक पर देश की सियासत गरम है. मोदी सरकार ने 8 अगस्त को लोकसभा में दो विधेयक वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 और मुसलमान वक्फ (खात्मा) विधेयक 2024 पेश किए थे. सरकार के मुताबिक, इन विधेयकों का उद्देश्य वक्फ बोर्ड के कामकाज के तौर तरीकों में सुधार लाना और वक्फ संपत्तियों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना है. विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई. उसके बाद इसे आगे की जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया है.

इसलिए होता है जेपीसी का गठन
संसद को एक ऐसी एजेंसी की जरूरत होती है, जिस पर पूरे सदन को भरोसा होता है. इसके लिए संसद की समितियां बनाई जाती हैं. इन समितियों में संसद के ही सदस्य होते हैं. किसी बिल या फिर किसी सरकारी गतिविधियों में वित्तीय अनिमितताओं के मामलों की जांच के लिए जेपीसी का गठन किया जाता है. इसकी जरूरत इसलिए होती है, क्योंकि संसद के पास बहुत सारा काम होता है. इन कामों को निपटाने के लिए समय भी कम होता है. इस कारण कोई काम या मामला संसद के पास आता है तो वो उस पर गहराई से विचार नहीं कर पाती.

ऐसे में बहुत सारे कामों को समितियां निपटाती हैं, जिन्हें संसदीय समितियां कहा जाता है. संयुक्त संसदीय समिति भी इसी मकसद से गठित की जाती है. इसमें दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य होते हैं. संसदीय समितियों का गठन संसद ही करती है. ये समितियां संसद के अध्यक्ष के निर्देश पर काम करती हैं और अपनी रिपोर्ट संसद या स्पीकर को सौंपती हैं.

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