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सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट रोकने के लिए बने कानून, केंद्रीय मंत्री बोले- ‘ये हमारी संस्कृति नहीं’

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नई दिल्ली,

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है. इस दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट रोकने के लिए कानून बनाने की मांग करते हुए उम्मीद जताई कि विपक्ष इस पर चर्चा करेगा. सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हमारी संस्कृति और वहां की संस्कृति में बहुत अंतर है, जहां से ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आए हैं. मुझे उम्मीद है कि विपक्ष इस पर चर्चा करेगा. उन्होंने कहा कि संसद की स्थायी समिति इस मुद्दे को उठाए और इस पर सख्त कानून बनाए.

रामानंद सागर के ‘रामायण’ सीरियल में भगवान राम का किरदार निभाकर प्रसिद्धी हासिल कर चुके बीजेपी सांसद अरुण गोविल ने अश्विनी वैष्णव की मांग का समर्थन किया. गोविल ने कहा कि सोशल मीडिया पर बहुत सारा ऐसा कंटेंट है, जो हमारी संस्कृति से मेल नहीं खाता. अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जिस तरह का कंटेंट आ रहा है, उसकी सख्त निगरानी करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में बहुत सारे प्राइवेट प्लेटफॉर्म आए हैं. कोई कानून नहीं होने के कारण इन प्लेटफॉर्म पर कुछ भी दिखाया जा रहा है. इस कंटेंट के कारण युवाओं को गुमराह किया जा रहा है. सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर आए कंटेंट के लिए जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए, जिससे वो ऐसे कंटेंट के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कर सकें.

सोशल मीडिया पर आ रहे कंटेंट के लिए कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए सरकार ने आईटी रूल्स लागू किए थे. अब कंपनियों को ग्रीवांस ऑफिसर नियुक्त करना होता है, ताकि यूजर्स शिकायत दर्ज करा सकें. साथ ही साथ कंपनियों को हर महीने ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट भी देनी होती है.

अश्विनी वैष्णव ने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया कंपनियों को सेल्फ-रेगुलेटरी अप्रोच अपनाना चाहिए, खासकर जब ऐसे कंटेंट को रोकने की बात आए, जो भारतीय संस्कृति के ताने-बाने को बिगाड़ सकता है. उन्होंने कहा कि फ्री स्पीच और रिस्पॉन्सिबल कंटेंट मॉडरेशन के बीच बैलेंस बनाने की जरूरत है.

इस महीने की शुरुआत में अश्विनी वैष्णव ने न्यूज मीडिया के सामने आने वाली बड़ी चुनौतियों के बारे में भी बात की थी. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अक्सर ऐसे कंटेंट को प्रायोरिटी देते हैं, जो सनसनीखेज होते हैं. उन्होंने कहा था कि फेक न्यूज तेजी से फैल रही हैं, जो न केवल मीडिया के लिए खतरा है, बल्कि लोकतंत्र के लिए भी बड़ा खतरा है

 

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