नई दिल्ली
पार्लियामेंट के मकर द्वार पर 19 दिसंबर को पक्ष-विपक्ष के सांसदों के बीच कथित तौर पर हुई धक्का-मुक्की मामले में संसद की सुरक्षा संभाल रही सीआईएसएफ का कहना है कि उनकी तरफ से कोई गलती नहीं हुई। अलबत्ता, वहां मौजूद सीआईएसएफ के जवानों ने अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभाई। मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा संसद के किसी भी द्वार पर धरना-प्रदर्शन करने से रोक लगाने वाले आदेश को देखते हुए इस मामले में अब एसओपी बनाई जाएगी। ताकि संसद में फिर से 19 दिसंबर जैसी घटना की पुनरावृत्ति ना होने पाए।
‘CISF की तरफ से नहीं हुई थी कोई गलती’
मामले में सीआईएसएफ के डीआईजी (ऑपरेशंस) श्रीकांत किशोर ने संसद में 19 दिसंबर वाली घटना के बारे में बताया कि उस दिन सीआईएसएफ की तरफ से कोई गलती नहीं हुई, किसी हथियार को अनुमति नहीं दी गई। जब उनसे कुछ सांसदों द्वारा संसद के एंट्री गेट पर तैनात सीआईएसएफ के अधिकारियों द्वारा उन्हें ना पहचानने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि संसद की सुरक्षा संभालते हुए सीआईएसएफ को करीब छह महीने का वक्त हो चुका है। सभी का फीडबैक सीआईएसएफ के प्रति पॉजिटिव आया है। रही बात किसी सदस्य के आरोप लगाने की तो सीआईएसएफ इस पर चुप रहना पसंद करेगा। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी सांसद की सुरक्षा जांच नहीं की जाती है।
कोई बल नहीं कर रहा जांच
सीआईएसएफ ने यह भी कहा कि 19 दिसंबर को संसद के मकर द्वार पर हुई घटना के मामले में बल कोई जांच नहीं कर रहा और ना ही ऐसा कोई आदेश मिला है। इस घटना में बीजेपी के दो सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत चोटिल हो गए थे। जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में बीजेपी की शिकायत पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कांग्रेस की तरफ से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भी चोटिल होने की शिकायत की गई थी।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे गए
मामले में सीआईएसएफ के एक अधिकारी ने बताया कि चूंकि इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही है। रही बात संसद में लगे सीसीटीवी कैमरों में घटना कैद होने की तो स्पॉट के आसपास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की उस दिन की फुटेज सुरक्षित रख ली गई है। सूत्रों ने यह तो नहीं बताया कि क्या किसी फुटेज में कथित तौर पर सांसदों के बीच हुई धक्का-मुक्की की फुटेज भी कैद हुई है। लेकिन सूत्रों का यह जरूर कहना है कि अगर यहां लगे कुछ कैमरों की रिकॉर्डिंग दिल्ली पुलिस जांच के लिए मांगेगी। तब उचित अथॉरिटी के आदेश पर इसे जांच एजेंसी को दिया जा सकता है।
