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LAC पर कैसे घटेगी टेंशन! चीन ने सैनिक पीछे बुलाए लेकिन ताजा तस्वीरों से उठे मंशा पर सवाल

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नई दिल्ली,

पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक के मैदानों में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच सैनिकों की वापसी पूरी हो गई है. इस बात की तस्दीक सैटेलाइट इमेजेस से होती है, तस्वीरों में साफ पता चल रहा है कि सैनिकों को वापस बुला लिया गया है, लेकिन जब विवादित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के तेजी से हो रहे निर्माण पर प्रकाश डाला गया, जिससे चीन की तनाव कम करने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा होता है.

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इस महीने की शुरुआत में संसद में कहा था कि तात्कालिक प्राथमिकता टकराव वाले पॉइंट्स से सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करना था, ताकि आगे कोई अप्रिय घटना या झड़प न हो. ये प्रक्रिया पूरी हो गई है. अब अगली प्राथमिकता तनाव कम करने पर विचार करना होगी, जो LAC पर सैनिकों की भीड़भाड़ को कम करेगी.

इंडिया टुडे/आजतक की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम द्वारा हाई रेज्योलूशन सैटेलाइट तस्वीरों में सैनिकों की वापसी के संकेत साफ दिखाई देते हैं, लेकिन चीन की ओर से तनाव कम करने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलता है. चीन पैंगोंग लेक के उत्तरी तट के पास विवादित क्षेत्रों में अपने सैन्य और दोहरे इस्तेमाल के लिए बुनियादी ढांचे बना रहा है, जबकि दोनों देश (भारत-चीन) द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर बातचीत कर रहे हैं.

स्पेस फर्म मैक्सार टेक्नोलॉजीज की सैटेलाइट तस्वीरों से पहली बार ये भी पता चलता है कि डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया के दौरान आगे की पोजिशन खाली करने के बाद डेपसांग में पीछे की पोजिशन में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा नए कैंप बनाए गए हैं. हालांकि दोनों पक्षों ने हाल ही में देपसांग और डेमचोक के टकराव वाले क्षेत्रों में मई 2020 की यथास्थिति बहाल करने पर सहमति जताई है.

पैंगोंग झील के उत्तरी तट पर मौजूदगी को मजबूत कर रहा चीन
फरवरी 2021 में बफर जोन बनाकर पैंगोंग झील पर डिसोल्यूशन किया गया था. हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि PLA पैंगोंग झील के उत्तरी तट पर विवादित क्षेत्रों में मौजूदा स्थिति को तेजी से मजबूत कर रहा है, जहां 2020 के गतिरोध से पहले संयुक्त रूप से गश्त की जाती थी.

सिरिजाप और खुरनाक पर क्या बोले एक्सपर्ट्स?
ऐसा लगता है कि चीनी सेना पीछे हटकर अपनी स्थिति मजबूत कर रही है. रक्षा विशेषज्ञ कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय रैना ने कहा कि भारत अभी भी सिरिजाप और खुरनाक को अपना क्षेत्र मानता है, लेकिन 1959-1962 के दौरान सिंधु में बहुत पानी बह चुका है, सिरिजाप और खुरनाक क्षेत्रों का ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि भारत उन्हें लद्दाख का हिस्सा मानता है, लेकिन 1959-1962 की अवधि के दौरान उसने प्रभावी नियंत्रण खो दिया. निर्माण और रणनीतिक विकास सितंबर में शुरू हुआ था, चीनी की ओर से निर्माण कार्य कई स्थलों पर जारी है, इसके बावजूद चीन की ओर से संबंधों को सामान्य बनाने की मांग की जा रही है. एक सैन्य सूत्र ने आजतक को बताया कि तस्वीरें दोहरे उपयोग वाले बुनियादी ढांचे को दिखाती हैं जो नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए है.

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