नई दिल्ली:
चीन भारतीय सीमा के करीब तिब्बत में दुनिया का सबसे बड़ा बांध बना रहा है। इसमें $137 अरब का निवेश किया जा सकता है जो भारत के किसी भी प्रोजेक्ट से ज्यादा है। भारत में दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल अब तक का सबसे खर्चीला प्रोजेक्ट माना जाता है। इसकी अनुमानित लागत 100 अरब डॉलर है। चीन बड़े-बड़े प्रोजेक्ट बनाने में माहिर है। हाल के वर्षों में उसने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जमकर निवेश किया है। एक अनुमान के मुताबिक 2011 से 2012 के बीच चीन में सीमेंट की जितनी खपत हुई, उतनी अमेरिका में 1901 से लेकर 2000 के बीच यानी 100 साल में हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने 2011 से 2013 के दौरान 6.4 गीगाटन सीमेंट का यूज किया। एक गीगाटन 1,000,000,000 टन के बराबर होता है। इस दौरान चीन ने The Three Gorges Dam बनाया जिसे दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन माना जाता है। सेंट्रल चाइना की यांगजी जियांग नदी पर स्थित इस बांध को बनाने में 1.6 करोड़ टन सीमेंट का यूज हुआ था। अमेरिका में साल 1901 से साल 2000 के बीच कई बहुमंजिला इमारतें, इंटरस्टेट और हूवर डैम बनाया था। लेकिन इस दौरान वहां कुल 4.5 गीगाटन सीमेंट की खपत हुई थी।
चीन में सीमेंट की मांग
आज चीन दुनिया का सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक और उपभोक्ता है। दुनिया का 60% सीमेंट चीन में बनता है। खपत में भी उसकी दुनिया में 60% हिस्सेदारी है। पिछले साल चीन ने 2.1 अरब टन सीमेंट को उत्पादन किया था जबकि बाकी दुनिया का उत्पादन दो अरब टन था। भारत का सीमेंट उत्पादन 41 करोड़ टन रहा। वियतनाम 11 करोड़ टन के साथ तीसरे और अमेरिका 9 करोड़ टन के साथ चौथे नंबर पर है। हालांकि भारत में भी सीमेंट की खपत बढ़ रही है। देश में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है।
