नागौर
राजस्थान का नागौर जिला कुछ मामलों को लेकर देशभर में सुर्खियों में रहा है। यहां के लोग बहन के भात भरने में करोड़ों रुपये की नकदी देने के मामले में चर्चा में रहे हैं। अब एक और मामला सामने आया है, जो नागौर जिले के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है। नागौर जिले के सीमावर्ती गांव में एक मकान ऐसा है, जिसके कमरे नागौर जिले में हैं, लेकिन घर की दहलीज जयपुर जिले में खुलती है। सुनने में भले ही आपको यह अजीब लगे लेकिन यह सच है।
तीन सगे भाई, लेकिन दस्तावेज अलग अलग जिलों के
नागौर जिले के इस सीमावर्ती गांव का नाम त्योद है। हालांकि नए जिलों के गठन के बाद यह गांव नागौर से अलग हुए कुचामन डीडवाना जिले का हिस्सा बन गया है। जयपुर की सीमा समाप्त होने के बाद नागौर (कुचामन डीडवाना) जिले का यह पहला गांव है। मुनाराम चोपड़ा नामक व्यक्ति ने वर्ष 2010 में त्योद गांव में एक खेत खरीदा था। बाद में उन्होंने अपने खेत में मकान बनाया।
इस मकान के कमरे नागौर (कुचामन डीडवाना) जिले की सीमा में हैं जबकि मकान की दहलीज जयपुर जिले की सीमा में खुलती है। मुनाराम चोपड़ा अपने दो भाइयों के साथ यहां रहते हैं। मुनाराम के सभी सरकारी दस्तावेज नागौर जिले के बने हैं, लेकिन उनके भाई सुवाराम और कानाराम के सभी सरकारी दस्तावेज जयपुर जिले के हैं।
दहलीज पर कदम रखते ही जिला चेंज
अमूमन लोगों को एक जिले से दूसरे जिले तक जाने के लिए वाहनों में सफर करना पड़ता होगा, लेकिन मुनाराम का परिवार ऐसा है कि उन्हें नागौर जिले से जयपुर जिले तक पहुंचने में एक मिनट भी नहीं लगता। घर में बने कमरों से बाहर निकलते ही जैसे वे दहलीज पर कदम रखते हैं। इतने में ही उनका जिला बदल जाता है। मकान की दहलीज के सामने वाली सड़क के एक तरफ नागौर जिला है तो दूसरी तरफ जयपुर जिला। तीन भाइयों में से एक भाई नागौरी है और दो जयपुरी।
