तेल अवीव
हमास के हमले के बाद से इजरायल पिछले एक साल से लड़ाई में हैं। इसके बाद युद्ध लेबनन में हिजबुल्लाह और यमन के हूती विद्रोहियों और ईरान तक फैल गया। हालांकि इसके बावजूद राजू निषाद और उनके जैसे अन्य मजदूरों यहां आने से नहीं रुके। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘यहां डरने की कोई बात नहीं है। कई बार हवाई हमले की चेतावनियों के कारण हमें शेल्टर की ओर भागने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सायरन बंद होते ही हम अपने काम पर लौट जाते हैं।’
सवाल उठता है कि लोग अपने घर से हजारों किमी दूर इस खतरनाक स्थिति में काम करने क्यों जाते हैं। दरअसल इजरायल में उच्च आय है, जहां, कुछ श्रमिक अपने देश में मिलने वाली आय से तीन गुना ज्यादा कमा सकते हैं, यही कारण है कि लोग यहां जाने को तैयार हो जाते हैं। पिछले एक साल में 16,000 भारतीय श्रमिक इजरायल पहुंचे हैं। इजरायल और भी हजारों श्रमिकों को लाने की योजना बना रहा है। निषाद कहते हैं, ‘मैं भविष्य के लिए पैसे बचा रहा हूं, समझदारी से निवेश की योजना बना रहा हूं और अपने परिवार के लिए कुछ अच्छा करना चाहता हूं।’
इजरायल में बढ़ी भारतीय मजदूरों की संख्या
भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। लेकिन इसके बावजूद व अपने लोगों के लिए पर्याप्त नौकरियां नहीं पैदा कर पा रहा है। दशकों से इजरायल में भारतीय काम कर रहे हैं। हजारों बुजुर्ग इजरायलियों की देखभाल करने के लिए भारतीय जाते हैं। वहीं अन्य हीरा व्यापारियों और आईटी पेशेवरों के रूप में काम करते हैं। लेकिन जब से गाजा का युद्ध तेज हुआ है तब से इजरायल के निर्माण क्षेत्र में भारतीय श्रमिकों की संख्या बढ़ी है।
बड़ी संख्या में इजरायल जाएंगे श्रमिक
दिल्ली स्थित डायनामिक स्टाफिंग सर्विसेज के अध्यक्ष समीर खोसला ने 30 से ज्यादा देशों में 5 लाख से ज्यादा भारतीयों को काम करने के लिए भेजा है। उनके जरिए 3500 से ज्यादा श्रमिक इजरायल पहुंचे हैं। वह स्वयं भी 7 अक्तूबर के हमले के एक महीने के बाद पहली बार इजरायल पहुंचे थे। खोसला ने कहा, ‘हम इस बाजार के बारे में ज्यादा नहीं जानते थे और यहां भारत का कोई मौजूदा श्रमिक वर्ग नहीं था।’ खोसला अब 10 हजार भारतीय श्रमिक भेजने की उम्मीद करते हैं, क्योंकि उनके पास सभी ट्रेडों में कुशल श्रमिकों का बड़ा नेटवर्क है।
