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8वां वेतन आयोग: बड़ा अपडेट, अचानक क्‍यों देरी की लगने लगी हैं अटकलें? पूरी डिटेल

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नई दिल्‍ली

8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि इसे 1 जनवरी, 2026 से लागू किया जाएगा। हालांकि, सरकार ने अभी तक आयोग के लिए नियम और शर्तें जारी नहीं की हैं। बजट 2025 में करदाताओं के लिए कई प्रस्ताव पेश किए गए। लेकिन, आठवें वेतन आयोग को लागू करने के लिए केंद्र सरकार के खर्च का कोई जिक्र नहीं किया गया। इससे इसके लागू होने में देरी की अटकलें लगाई जाने लगी हैं।

वहीं, व्यय सचिव मनोज गोविल ने साफ किया है कि आठवें वेतन आयोग का वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल को आयोग के लिए नियम और शर्तों को मंजूरी देनी होगी। इसके लिए कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग और रक्षा मंत्रालय से भी राय ली जाएगी।

क्‍या कह रहे हैं एक्‍सपर्ट्स?
किंग स्टब एंड कसीवा, एडवोकेट्स एंड अटॉर्नीज के पार्टनर रोहिताश्व सिन्हा ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, ‘आठवें वेतन आयोग की कार्यान्वयन प्रक्रिया सातवें वेतन आयोग के कार्यकाल की समाप्ति के बाद 2026 में शुरू होगी। वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन ढांचे के मूल्यांकन के लिए एक नियमित 10 साल की प्रक्रिया बन गए हैं। 1 जनवरी, 2026 से आठवें वेतन आयोग के लागू होने की संभावना कम है। हालांकि, सातवें वेतन आयोग की कार्यान्वयन तारीख 2016 में हुई थी, इस प्रकार यह संकेत मिलता है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें 2026 में लागू होंगी।’

गांधी लॉ एसोसिएट्स के पार्टनर राहेल पटेल कहते हैं, ‘पिछले रुझानों को देखते हुए वेतन आयोगों को अपनी सिफारिशें देने में आमतौर पर एक साल लगता है। इसका मतलब है कि सैद्धांतिक रूप से 1 जनवरी, 2026 से कार्यान्वयन संभव है। हालांकि, बजटीय प्रावधानों की कमी इस बारे में संदेह पैदा करती है कि क्या वित्तीय बोझ को वर्तमान वित्तीय योजना के भीतर समायोजित किया जाएगा। इसके अलावा, व्यय सचिव का यह बयान कि लागत प्रभाव वित्त वर्ष 2026-27 से महसूस किया जाएगा, का मतलब है कि वास्तविक वित्तीय समायोजन स्थगित कर दिए जाएंगे। इसका मतलब चरणबद्ध कार्यान्वयन या देरी से रोलआउट हो सकता है।’

आयोग के गठन को जनवरी में म‍िली थी मंजूरी
सरकार केंद्र सरकार के कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों के वेतन और पेंशन का पुनर्मूल्यांकन और बढ़ोतरी करने के लिए आठवां वेतन आयोग स्थापित करने की प्रक्रिया में है। आगामी समीक्षा में महंगाई के साथ वेतन बढ़ोतरी और महंगाई भत्ते में समायोजन शामिल होगा।

इसी साल 16 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आठवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी थी। यह आयोग लगभग 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन और 65 लाख पेंशनर्स के भत्तों का मूल्यांकन करने के लिए जिम्मेदार होगा।

इस महीने की शुरुआत में नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (JCM) स्टाफ साइड ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के नियम और शर्तों (ToR) के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं। उसके सुझावों में सरकारी कर्मचारियों के लिए सैलरी स्‍ट्रक्‍चर, भत्ते और लाभों में महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। ToR के भीतर एक उल्लेखनीय प्रस्ताव सैलरी स्‍ट्रक्‍चर को सरल बनाने और करियर प्रगति विसंगतियों को दूर करने के लिए कुछ वेतनमानों का विलय है।

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने हाल ही में पिछले महीने सरकार की ओर से दी गई मंजूरी के बाद आगामी आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए नियम और शर्तों को अंतिम रूप देने में मदद करने के लिए राष्ट्रीय परिषद JCM के स्टाफ साइड से सुझाव मांगे थे।

NC-JCM स्टाफ साइड के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने ध्यान देने योग्य प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डालते हुए एक व्यापक प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। स्टाफ साइड की महत्वपूर्ण सिफारिश लेवल 1-6 के भीतर सरकारी कर्मचारियों के लिए वेतनमान को समेकित करना है।

वर्तमान में वेतनमान संरचना में 18 लेवल होते हैं, जो स्तर 1 से स्तर 18 तक होते हैं। सातवें वेतन आयोग के अनुसार, स्तर 1 पर न्यूनतम मासिक वेतन 18,000 रुपये निर्धारित किया गया था, जबकि स्तर 18 पर अधिकतम वेतन 2,50,000 रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया था।

स्टाफ साइड की ओर से प्रस्तुत एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव उचित मुआवजा सुनिश्चित करने और करियर में प्रगति को सुविधाजनक बनाने के लिए कम वेतनमान को समेकित करने का सुझाव देता है। सिफारिश में विशिष्ट स्तरों- स्तर 1 और स्तर 2, स्तर 3 और स्तर 4, स्तर 5 और स्तर 6 का विलय शामिल है।

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