नई दिल्ली:
न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक घोटाले मामले में पुलिस के हाथ एक और बड़ी कामयाबी लगी है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इस बैंक के पूर्व चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) अभिमन्यु भोआन को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। जांच के दौरान बैंक में 122 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है।
इस मामले में यह तीसरी गिरफ्तारी है। बैंक के जनरल मैनेजर हितेश मेहता पर बैंक के 122 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने का आरोप है। अभिमन्यु को गुरुवार और शुक्रवार को अपना बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। ईओडब्ल्यू के एक अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान अपराध में उनकी भूमिका स्पष्ट होने के बाद उन्हें शुक्रवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया।ईओडब्ल्यू ने पहले इस मामले में हितेश मेहता और डेवलपर धर्मेश पौन को गिरफ्तार किया था। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निरीक्षण के बाद धन की कथित हेराफेरी का पता चला।
कैसे हुआ इस बैंक में घोटाला?
रिजर्व बैंक को बैंक में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। इसके बाद बैंक के कामकाज पर रोक लगा दी गई थी। जांच के दौरान पता चला कि बैंक में काफी रकम का घोटाला हुआ है। यह घोटाला फर्जी डॉक्यूमेंट और बैंकिंग प्रक्रियाओं के उल्लंघन के जरिए किया गया। बैंक के अधिकारियों ने नकली ट्रांजेक्शन दिखाकर बैंक में जमा रकम का दुरुपयोग किया। जांच में यह भी पता चला है कि बैंक के रेकॉर्ड में कई खामियां थीं, जिन्हें लंबे समय तक छिपाकर रखा गया था।
रिजर्व बैंक ने लगाई है रोक
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंक पर 13 फरवरी को रोक लगाई थी। बैंक के ग्राहक अपना पैसा भी नहीं निकाल सकते। यही नहीं, केंद्रीय बैंक ने इस बैंक पर नए लोन देने, पैसा जमा करने, एफडी आदि पर भी रोक लगा दी है। रिजर्व बैंक का कहना है कि बैंक की स्थिति सुधरने तक ये प्रतिबंध लागू रहेंगे। रिजर्व बैंक के इस आदेश के बाद अगले दिन यानी 14 फरवरी को बैंकों की ब्रांच के बाहर ग्राहकों की भीड़ जमा हो गई थी।
