मुंबई
डिजिटल अरेस्ट की ना जाने कितनी खबरें हमने बनाई होंगी, आपने पढ़ी होंगी। लेकिन मुंबई से सामने आया मामला रोंगटे खड़े कर देने वाला है। 86 साल कम उम्र नहीं होती। लोगों को इस पड़ाव तक आते-आते जरूरत होती है सहारे की। और एक बुजुर्ग महिला उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचकर फंस गई साइबर अपराधियों के चंगुल में। वो ‘डिजिटल अरेस्ट’ हो गईं। यह सिलसिला कुछ घंटों या दिनों का नहीं था। वह करीब 68 दिन डिजिटल अरेस्ट में रहीं। यानी अपराधियों ने उन्हें ऑनलाइन अपने चंगुल में फंसा लिया था। 26 दिसंबर से 3 मार्च तक उन्होंने आरोपियों को 20 करोड़ से ज्यादा की रकम ट्रांसफर कर दी। इसे भारत का सबसे लंबा डिजिटल अरेस्ट स्कैम बताया जा रहा है। एक ऐसी घटना, जिसे सोचने भर से चिंता पैदा होती है। आइए जानते हैं पूरा मामला और समझते हैं कि ऐसे बचा जाए।
पुलिस वाला बनकर बहका दिया बुजुर्ग को
इस धोखाधड़ी की शुरुआत होती है 26 दिसंबर 2024 को और यह खत्म होती है 3 मार्च 2025 के आसपास। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया था। उन्होंने कॉल पर महिला से संपर्क किया। उसके बाद झूठे आरोप लगाने शुरू कर दिए। महिला को कहा गया कि उनके आधार कार्ड से इंडियन बैंक में एक फर्जी अकाउंट खोला गया था। महिला से कहा गया कि उनके कथित अकाउंट से बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। अब पुलिस उन पर एक्शन लेगी।
महीनों तक चलता रहा सिलसिला
20 करोड़ छोटी रकम नहीं होती। इतने पैसे बुजुर्ग महिला से एकबार में ट्रांसफर करवाना मुमकिन नहीं था। ऐसे में पुलिस ने महिला को भरोसे में लिया और कहा कि उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में घटना की बहुत डिटेल तो सामने नहीं आई है, पर ऐसा लगता है कि आरोपियों ने कई किस्तों में महिला से रकम ट्रांसफर करवाई होगी। कुल 20.25 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवाए जाने की बात अबतक सामने आई है।
पुलिस के चंगुल में कुछ आरोपी
पुलिस ने इस मामले में अबतक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक आरोपी ठगों के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा है। आरोपी ने टेलिग्राम ऐप पर एक ग्रुप बनाया था, जिसमें ऐसे भारतीय अकाउंट्स की डिटेल शेयर की जा रही थी, जिसमें मोटी रकम थी। आरोपी आगे भी भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने की फिराक में थे।
आपको क्या कदम उठाने चाहिए
डिजिटल अरेस्ट अब नया नहीं है। इस तरह के मामलों में आरोपी, पीड़ितों को वीडियो कॉल पर बंदी बनाने की कोशिश करते हैं। उन्हें झूठे आरोपों में फंसाकर पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। अगर आप कभी इस सिचुएशन में फंसते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप सीधे इस तरह की कॉल्स को कट कर दें। उनको रिप्लाई ना करें। फौरन नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराएं। पीड़ित महिला ने भी ठगी के बाद ऐसा ही किया था।
