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इलाहाबाद हाई कोर्ट के रेप केस फैसले पर बवाल, केंद्रीय मंत्री बोलीं- ये समाज के लिए खतरनाक

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नई दिल्ली:

इलाहाबाद हाई कोर्ट के बलात्कार से जुड़े एक मामले में दिए गए फैसले पर बवाल मच गया है। कोर्ट ने बलात्कार के आरोप को लेकर एक टिप्पणी की थी। इस पर केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और कई लोगों ने अदालत की आलोचना की है। उन्होंने न्यायिक सुधारों की मांग की है। हाई कोर्ट ने कहा था कि कुछ हरकतें बलात्कार नहीं मानी जाएंगी। इस फैसले के बाद कई सवाल उठ रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कोर्ट के फैसले की आलोचना की
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर अपनी राय रखी। उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “मैं इस फैसले का समर्थन नहीं करती। सुप्रीम कोर्ट को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। इससे समाज पर बुरा असर पड़ेगा।”

हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर कोई किसी महिला के ब्रेस्ट को पकड़ता है या उसकी पायजामा का नाड़ा तोड़ता है, तो यह बलात्कार नहीं माना जाएगा। हालांकि, यह हमला या महिला को निर्वस्त्र करने की कोशिश माना जा सकता है।

जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की बेंच ने कहा कि अपराध की तैयारी और अपराध करने में फर्क होता है। उन्होंने कहा, “आरोपियों, पवन और आकाश पर जो आरोप लगे हैं, वे बलात्कार की कोशिश के अपराध को साबित नहीं करते। बलात्कार की कोशिश का आरोप लगाने के लिए यह साबित करना होगा कि तैयारी से आगे कुछ हुआ था।”

स्वाति मालीवाल बोलीं- ये बयान समाज के लिए खतरनाक
इससे पहले राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने भी हाई कोर्ट की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “ब्रेस्ट पकड़ना, पायजामा का नाड़ा तोड़ना बलात्कार का अपराध नहीं है… यह बयान बहुत असंवेदनशील है और समाज के लिए बहुत खतरनाक है। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल देना चाहिए।”

बीजेपी नेता ने की तीखी आलोचना
वहीं बीजेपी नेता पल्लवी ने एक्स पर लिखा, “भारतीय न्यायपालिका का एक और नगीना? इलाहाबाद हाई कोर्ट का कहना है कि पीड़िता के ब्रेस्ट को पकड़ना, पायजामा का नाड़ा तोड़ना बलात्कार की कोशिश नहीं है। लड़की सिर्फ 11 साल की थी। पॉक्सो और BNS के सख्त कानूनों का क्या फायदा जब ऐसे फैसले दिए जाते हैं? छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले को याद करें जिसमें एक आदमी को बरी कर दिया गया था जिसकी पत्नी की अप्राकृतिक सेक्स के कारण मौत हुई थी?”

जानी मानी वकील इंदिरा जयसिंह ने भी इस मामले पर कहा,”सुप्रीम कोर्ट को इस पर खुद ही कार्रवाई करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी जजों को छोटी-छोटी बातों के लिए फटकार लगाई है।”

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