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सपा सांसद के दावे में सच्चाई तो है, राणा सांगा ने बाबर को भारत बुलाया था? जानिए इतिहासकार क्या कहते हैं

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लखनऊ:

समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के राणा सांगा और बाबर को लेकर दिए गए बयान पर राजनीति गरमा गई है। सपा सांसद ने कहा कि इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को राणा सांगा भारत लेकर आया था। उन्होंने राणा सांगाको गद्दार कहा है। इसको लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रामजी लाल सुमन के बयान का समर्थन करते हुए बीजेपी को इतिहास के पन्ने न पलटने की नसीहत दी है। वहीं, बीजेपी ने सपा को ऐसे शर्मनाक कृत्य पर पूरे देश से माफी मांगने की मांग की है। बीजेपी नेता संजीव बालियान का कहना है कि सपा सांसद ने राजपूत समाज और समस्त हिंदू समाज का घोर अपमान किया है। वहीं, बाबर और राणा सांगा को लेकर हो रही राजनीति को लेकर इतिहासकार का क्या कहना है, आइए जानते हैं।

ये बहुत ही कंट्रोवर्शियल इश्यू है- रवि भट्ट
इतिहासकार रवि भट्ट ने एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत करते हुए बताया कि ये बहुत ही कंट्रोवर्शियल इश्यू है, क्योंकि इसको लेकर दोनों पक्ष के इतिहासकार अपनी बात सिद्ध करने के लिए तथ्यों को अपने-अपने हित में तोड़ मरोड़कर पेश कर रहे हैं। रवि भट्ट बताते हैं कि इसके दो तथ्य सामने आते हैं। पहला ये है कि बाबरनामा में बताया गया कि राणा सांगा ने बाबर को बुलाया था, जबकि दूसरे इतिहासकार गौरीशंकर ओझा और जेएन शर्मा का कहना है कि राणा सांगा ने बाबर को नहीं बुलाया था। रवि भट्ट ने बताया कि इन दोनों (गौरी शंकर और जेएन शर्मा) इतिहासकारों का कहना है कि बाबर ने भारत में आक्रमण करने से पहले राणा सांगा से मदद मांगी थी। इसको लेकर राणा सांगा पहले एग्री कर गए थे, लेकिन बाद में सलाहकारों के कहने पर बैकआउट कर गए थे।

राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को तीन युद्ध में हराया- इतिहासकार
इतिहासकार रवि भट्ट ने बताया कि वहीं दूसरे पक्ष के इतिहासकार बाबरनामा के आधार पर दावा करते हैं कि राणा सांगा ने बाबर को चिट्ठी लिखकर भारत आने के लिए कहा था। रवि भट्ट के मुताबिक, जबकि इतिहासकार गौरी शंकर और जेएन शर्मा का कहना था कि आखिर राणा सांगा बाबर से मदद क्यों मांगेगा। राणा सांगा इब्राहिम लोदी को तीन युद्ध में हरा चुका था। यहीं नहीं, 1527 में राणा सांगा ने बाबर को बयाना के युद्ध में भी हराया था, इसलिए इतिहासकारों का यह भी कहना है कि जब राणा सांगा अकेले ही इब्राहिम लोदी को हरा रहा था, तो बाबर को हराने के लिए क्यों बुलाएगा। वहीं, इस मुद्दे को लेकर फिलहाल प्रदेश में ही नहीं, बल्कि देश में भी राजनीति गरमा गई है।

सपा सांसद के इस बयान पर मचा बवाल
बता दें कि बीते शुक्रवार को राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के राजयसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया था। सपा सांसद ने कहा कि बीजेपी के लोगों का तकियाकलाम हो गया है कि इनमें बाबर का डीएनए है। वे लोग हर जगह इस बात को दोहराते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान का मुसलमान तो बाबर को नहीं, मोहम्मद साहब को अपना आदर्श मानता है। यहां का मुसलमान सूफी-संतों की परंपरा को अपना आदर्श मानता है। रामजी लाल सुमन ने आगे कहा कि मैं जानना चाहूंगा कि बाबर को आखिर लाया कौन। उन्होंने कहा कि इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को राणा सांगा लेकर आया था। मुसलमान बाबर की औलाद हैं, लेकिन तुम तो गद्दार राणा सांगा की औलाद हो। बाबर की आलोचना हो, तो राणा सांगा की आलोचना क्यों नहीं?

कौन थे राणा सांगा
राणा सांगा (महाराणा संग्राम सिंह) उदयपुर में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा थे और राणा रायमल के सबसे छोटे बेटे थे। राणा सांगा ने मेवाड़ में 1509 से 1528 तक शासन किया था, जो आज भारत के राजस्थान प्रदेश में स्थित है। राणा रायमल की मृत्यु के बाद 1509 में राणा सांगा मेवाड़ के महाराणा बनाए गए थे। इन्होंने अपनी शक्ति के बल पर मेवाड़ साम्राज्य का विस्तार किया। राणा सांगा ने विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ सभी राजपूतों को एक किया था। इन्होंने दिल्ली, गुजरात और मालवा, मुगल बादशाहों के आक्रमणों से अपने राज्य की रक्षा की थी। उस समय के वह सबसे शक्तिशाली राजा थे।

राणा सांगा से जुड़े तथ्य
फरवरी 1527 ई. में खानवा के युद्ध से पूर्व बयाना के युद्ध में राणा सांगा ने मुगल सम्राट बाबर की सेना को परास्त कर बयाना का किला जीत लिया था। खानवा की लड़ाई में हसन खां मेवाती राणा के सेनापति थे। युद्ध में राणा सांगा के कहने पर राजपूत राजाओं ने पाती परवन परंपरा का निर्वाहन किया था। बयाना के युद्ध के बाद 16 मार्च 1527 ई. में खानवा के मैदान में राणा सांगा घायल हो गए थे। ऐसी अवस्था में राणा सांगा को युद्ध मैदान से बाहर निकलना पड़ा था। उनकी जगह उनके परम मित्र राज राणा अज्जा झाला ने ले ली थी। राणा सांगा इतने वीर थे कि एक भुजा, एक आंख, एक टांग खोने और अनगिनत ज़ख्मों के बावजूद उन्होंने अपना महान पराक्रम नहीं खोया था। खानवा की लड़ाई में राणा को लगभग 80 घाव लगे थे। राणा सांगा को सैनिकों का भग्नावशेष भी कहा जाता है। बाबर भी अपनी आत्मकथा में लिखता है कि राणा सांगा अपनी वीरता और तलवार के बल पर अत्यधिक शक्तिशाली हो गया है।

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