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बीजेपी को संदेश, भाषा विवाद पर सीख… औरंगजेब पर खरी-खरी, RSS के तीन दिन के मंथन से क्या-क्या निकला

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नई दिल्ली

बेंगलुरु में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिन तक चली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक खत्म हो गई। इस दौरान संघ के नेताओं ने मीडिया से बातचीत भी की। खास बात है कि संघ की तरफ से बीजेपी के बारे में सीधे सवालों से दूरी बनाए रखी। हालांकि, परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण के राज्यों में सीटें कम नहीं होने को लेकर बीजेपी को संदेश भी दे दिया। परिसीमन को लेकर संघ ने साफ कहा कि ‘दक्षिणी राज्यों का लोकसभा में अनुपात वही रहेगा’। इसके साथ ही संघ ने तीन-भाषा फार्मूले पर संतुलित रुख बनाए रखा गया। बैठक में बांग्लादेश में औरंगजेब विवाद के साथ ही हिंदुओं की स्थिति को लेकर भी चर्चा हुई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर संघ के इस तीन दिन के कर्नाटक मंथन से क्या निकला।

क्यों अहम रही ये बैठक
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। इसकी वार्षिक बैठक में चर्चा किए गए मुद्दे और लिए गए निर्णय न केवल आरएसएस को अगले वर्ष के लिए दिशा देते हैं, बल्कि सरकार को भी संकेत देते हैं कि वह नीतिगत स्तर पर क्या लागू करना चाहती है।

1. औरंगजेब विवाद में दाराशिकोह की तारीफ
संघ ने महाराष्ट्र में मुगल बादशाह औरंगजेब को लेकर चल रहे विवाद को लेकर बैठक में चर्चा की। इस मुद्दे पर संघ ने मुगल शासक की आलोचना की। खास बात है कि संघ की तरफ से औरंगजेब की आलोचना के साथ ही उसने उसके भाई दारा शिकोह का जश्न भी मनाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि औरंगजेब का महिमामंडन किया गया, उसके भाई दारा शिकोह का नहीं जो कि सामाजिक सद्भाव में विश्वास करने वाला व्यक्ति था। होसबाले ने कहा कि भारत के मूल्यों के खिलाफ जाने वाले लोगों को आदर्श बनाया गया।

2. लोकसभा सीटों का परिसीमन
ऐसे समय में जब बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार त्रिभाषा फार्मूले को लेकर असमंजस में हैं, आरएसएस ने इस विवाद को दरकिनार करते हुए मातृभाषा, व्यक्ति के निवास स्थान की क्षेत्रीय भाषा तथा करियर की भाषा, जो अंग्रेजी या कोई अन्य भाषा हो सकती है, के उपयोग की वकालत की है।

संघ के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार ने परिसीमन प्रक्रिया पर चर्चा करने वालों के लेकर सवाल उठाया किक्या उनका कोई राजनीतिक एजेंडा है या फिर वे वास्तव में इसे लेकर चिंतित हैं। आरएसएस नेता ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया शुरू होने और अधिनियम का मसौदा तैयार होने पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न तो जनगणना शुरू हुई है और न ही परिसीमन पर चर्चा (केंद्र द्वारा) शुरू की गई है। यहां तक कि अधिनियम का मसौदा भी अभी तक तैयार नहीं हुआ है।

3. तीन भाषा फॉर्मूला विवाद
तीन भाषा फॉर्मूला विवाद को लेकर संघ संयुक्त महासचिव सी आर मुकुंद ने कहा कि संघ मातृभाषा को शिक्षा और दैनिक संचार का माध्यम बनाने का समर्थन करता है। तीन भाषाओं को लेकर विवाद के बारे में पूछे जाने पर मुकुंद ने पहले ही कह दिया था कि संघ कोई प्रस्ताव पारित नहीं करेगा। मुकुंद ने कहा कि संघ का हमेशा जोर यही रहा है कि मातृभाषा में ही पढ़ाई हो। सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि जहां भी संभव हो मातृभाषा का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दो भाषा या तीन भाषा फॉर्मूला को लेकर संघ का कोई संकल्पपत्र नहीं है, लेकिन मातृभाषा को लेकर संघ का रिजॉल्यूशन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारा मानना है कि समाज में भी हमें कई भाषा सीखनी चाहिए। एक मातृभाषा और दूसरी मार्केट लैंग्वेज सीखनी चाहिए। तमिलनाडु में हैं तो तमिल, दिल्ली में हैं तो हिंदी सीखने की जरूरत होगी। इसी तरह करियर लैंग्वेज जैसे इंग्लिश या दूसरी भाषा भी महत्वपूर्ण हैं।

4. बांग्लादेश में हिंदुओं पर प्रस्ताव पारित
बैठक के दूसरे दिन, संघ ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचारों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। संघ की प्रतिनिधि सभा ने इस मुद्दे पर ‘बांग्लादेश के हिन्दू समाज के साथ एकजुटता से खड़े होने का आह्वान’ शीर्षक वाला एक प्रस्ताव भी पारित किया। इसमें अंतरराष्ट्रीय ताकतों और ‘अमेरिका में डीप स्टेट’ के प्रयासों का उल्लेख किया गया। संघ के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं की जिम्मेदारी भारत की है और ‘हम इस कर्तव्य से बच नहीं सकते।’

प्रस्ताव में कहा गया कि धार्मिक संस्थानों पर व्यवस्थित हमलों, क्रूर हत्याओं, जबरन धर्मांतरण और हिन्दुओं की संपत्तियों को नष्ट करने के चक्र ने बांग्लादेश में हिन्दू समुदाय के लिए अस्तित्व का संकट पैदा कर दिया है। प्रस्ताव में धार्मिक असहिष्णुता और मानवाधिकारों के उल्लंघन के इन कृत्यों की कड़ी निंदा की गई है और वैश्विक समुदाय से निर्णायक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।

संघ महासचिव अरुण कुमार ने कहा कि भारत को हम गर्व से अपना देश कहते हैं, उसे बांग्लादेश के हिंदुओं ने उतना ही आकार दिया है जितना कि भारत के हिंदुओं ने। उन्होंने आगे कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं को शांति और खुशी से रहना चाहिए। उन्हें अपने देश में योगदान देना चाहिए, लेकिन अगर भविष्य में कोई मुश्किल स्थिति आती है, तो हम पीछे नहीं हट सकते। अगर ऐसी स्थिति आती है, तो हम उसका समाधान करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और बांग्लादेश का इतिहास और सभ्यता एक जैसी है। प्रस्ताव में इस चिंता का उल्लेख किया कि जब तक सामान्य स्थिति पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाती, तब तक प्रयास जारी रहने चाहिए।

5. बीजेपी के अध्यक्ष पद पर स्थिति साफ
संघ ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि बीजेपी के नए अध्यक्ष के चयन को लेकर उसका पार्टी के साथ कोई मतभेद नहीं है। आरएसएस ने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से बीजेपी पर निर्भर है। संघ के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार ने कहा कि संघ के सदस्य 32 संबद्ध संगठनों में काम करते हैं। प्रत्येक संगठन स्वतंत्र है और उसकी अपनी निर्णय लेने की प्रक्रिया है। उनकी अपनी सदस्यता संरचना और स्थापित प्रक्रियाएं हैं।

कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी ध्यक्ष के चुनाव के लिए समन्वय समिति की बैठक नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी की प्रक्रिया चल रही है, सदस्यता पूरी हो चुकी है और विभिन्न स्तरों पर समितियों का गठन हो चुका है। आने वाले दिनों में बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव होगा। इससे पहले चर्चा चल थी कि बीजेपी और आरएसएस किसी उपयुक्त उम्मीदवार पर सहमत नहीं हो पाए हैं, जिससे दोनों संगठनों के बीच टकराव की अटकलें लगाई जा रही हैं।

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