देवघर/ नई दिल्ली
संसद में वक्फ संशोधन बिल पर बोलते हुए बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि सभापति महोदय मैं दो तीन चीजों की तरफ आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। मुजफ्फर रिजवी जी ने एक शायरी लिखी। लम्हों ने खता की है, सदियों ने सजा पाई है। पर क्या सजा है। ये पूरी दुनिया को जानने वाला सवाल है, सर कि हिंदू वक्फ बोर्ड में क्यों आएं? पैगम्बर मोहम्मद साहब ने वक्फ करने के लिए कहा। पहला वक्फ जिसने मोहम्मद साहब को किया। वो यहूदी था। उसका नाम मुखेरत था। उसने अपने सात बगीचे मदीना साहब को दे दिए। मोहम्मद साहब ने उसके मारे जाने के बाद उसकी संपत्ति को जब्त किया।
हिंदुओं ने दिया दान
उन्होंने आगे कहा कि पहला चैरिटेबल वक्फ स्टार्ट किया। यदि मुसलमानों ने पहला वक्फ नहीं दिया। आप मोहम्मद साहब के सिद्धांत के खिलाफ जाकर आप हिंदुओं को कैसे रोक सकते हो। दूसरा सवाल ये है। मैं कोर्ट का आदेश लेकर आया हूं। एमपी वक्फ बोर्ड वर्सेस शुभम साह। ये 2007 का ऑर्डर है। जो भोपाल की मस्जिद है। जिसे शहंशाह- ए- मालवा कहते हैं। ये राजा होलकर ने दान दिया वक्फ बोर्ड को। हिंदु दान दे बहुत अच्छा। यहूदी दान दे बहुत अच्छा। लेकिन वक्फ बोर्ड में मुसलमान को छोड़कर कोई दूसरा कैसे होगा। हिंदू ने दिया। ये जितने लोगों ने कहा है उन्होंने पूरी दुनिया को झूठ बोला है। यदि वक्फ की संपत्ति हिंदुस्तान में राजा- महाराजाओं ने दी। आप उसमें हिंदुओं को क्यों नहीं मेंबर बनाओगे।
जिन्ना की हुई चर्चा
उन्होंने आगे कहा कि दूसरा आज इस देश में फैसला हो जाना चाहिए। यहां गोरे आए, गजनी आए और बाबर आए। तीनों लुटेरे के तौर पर आए। गोरे को और गजनी को अक्रांता मानते हो कि नहीं मानते हो। हिंदुस्तान में पहले वक्फ की शुरुआत मोहम्मद गोरी ने की। गोरी ने हिंदुओं की संपत्ति को लूटा। इस देश में ये वक्फ एक्ट आया कैसे। ये जिन्ना को पाकिस्तान बनाने का जिम्मेदार मानते हैं कि नहीं मानते हैं। ये मैं पेपर लेकर आया हूं सर। 1910 में कांग्रेस पार्टी ने मुंबई से। उसने जिन्ना को मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बनाया। जिन्ना ने वक्फ बोर्ड बनाया। आज फिर वक्फ के नाम पर इस देश का बंटवारा करना चाहते हैं।
प्रमाण देकर समझाया
निशिकांत दुबे ने कहा कि आजादी के बाद आज तक किसी का प्राइवेट मेंबर बिल पास हुआ है। मेरा एक रिज्योलूशन पास हुआ है। धारा 370 खत्म होना चाहिए। 35 ए खत्म होना चाहिए। इसलिए पास हुआ कि वो बीजेपी की आइडियोलॉजी थी। ये जो 1954 का वक्फ एक्ट है। 1952 में इसे काजमी साहब लेकर आए। जब ये बिल पास हो गया तो सेलेक्ट कमेटी बनी। उसके मेंबर थे अमजद अली। आप मुसलमानों की बात करते हैं। दो लोग थे। एक का नाम था मोहन लाल सक्सेना। दूसरे का नाम अमजद अली। ये लोग खिलाफ थे लेकिन कांग्रेस मुसलमानों को प्रभावित करने के लिए इस बिल को पास कराना चाहती थी। एक गैर सरकारी बिल को सरकारी बिल बताकर मुसलमानों की राजनीति करते हो आप।
मुसलमानों की बात
उन्होंने कहा कि हमारे यहां से ज्यादा मुसलमान तुर्की में, इंडोनेशिया में और सऊदी में हैं। हम लोग बहुत संविधान की शपथ लेते हैं। संविधान की बात करते हैं। अमेरिका सेक्युलर है कि नहीं। अंग्रेज सेक्य़ुलर थे की नहीं। आप साउथ ब्लॉक, नार्थ ब्लॉक और प्रधानमंत्री के ऑफिस चले जाइए। राष्ट्रपति भवन जाइए। पुराना संसद भवन जाइए। आपको सब जगह गीता का श्लोक दिखाई देगा। एक बार ऊर्दू में नहीं और एक बात संस्कृत में नहीं। अमेरिका का राष्ट्रपति यदि शपथ लेगा, तो बाइबल पर लेगा। पूरी दुनिया में कोई मुस्लिम कंट्री नहीं है, जिसमें वक्फ बोर्ड कोई अधिकार दिया हुआ है। क्या भारत को आप मुस्लिम कंट्री बनाना चाहते हो। नेहरू ने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी। संविधान पर हाथ रखकर शपथ नहीं ली थी।
