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महिलाएं नौकरी करेंगी तो रेप होगा… नीना गुप्ता के फेमिनिज्म पर बेबाक बोल, कहा- औरत के रूप में पैदा होना अभिशाप

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नीना गुप्ता ने एक इंटरव्यू में फेमिनिज्म के मुद्दे पर बात करते हुए कुछ ऐसा कह दिया, जो सुर्खियां बटोर रहा है। एक्ट्रेस ने कहा कि अगर महिलाएं नौकरी करती हैं तो उनका रेप होता है। उनके मुताबिक, महिला के रूप में जन्म लेना अभिशाप है। नीना गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा, आइए आपको बताते हैं।

नीना गुप्ता ने साल 2023 में फेमिनिज्म यानी नारीवाद को लेकर एक बयान दिया था, जिस पर खूब विवाद हुआ था। उन्होंने एक बार रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में कहा था कि वह फेमिनिज्म जैसी फालतू चीजों पर यकीन नहीं करतीं। पुरुष और महिलाएं एक समान नहीं हैं, और उनकी तुलना नहीं की जानी चाहिए। नीना ने एक इंटरव्यू में यह भी कहा था कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए पुरुषों की जरूरत होती है।

नीना गुप्ता के फेमिनिज्म पर बेबाक बोल
अब लेटेस्ट इंटरव्यू में एक बार फिर नीना गुप्ता ने फेमिनिज्म पर बात की। पर साथ ही कहा कि वह कोई विवादित बयान नहीं देना चाहतीं। उन्होंने मीडिया को उनके शब्द तोड़-मरोड़कर बात को अलग ढंग से प्रेजेंट करने के लिए जिम्मेदार ठहराया।

‘महिलाओं के लिए जो चाहती हूं, वो संभव नहीं’
नीना गुप्ता ने लिली सिंह को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मेरे लिए नारीवाद (फेमिनिज्म) का मतलब है अंदर से मजबूत होना। मेरे लिए यही फेमिनिज्म है यानी मैं।’ जब नीना से पूछा गया कि वह आज आप इस देश में महिलाओं के लिए क्या चाहती हैं, तो वह बोलीं, ‘मैं जो चाहती हूं, वह संभव नहीं है। मैं चाहती हूं कि वो सुरक्षित रहें, लेकिन यह संभव नहीं है।’

‘अगर महिलाएं नौकरी करेंगी, तो उनका रेप होगा’
नीना गुप्ता ने आगे कहा, ‘वो कहते हैं कि महिलाओं को शिक्षित करो। अगर आप उन्हें शिक्षित करेंगे, तो वो नौकरी करना चाहेंगी और अगर वो नौकरी करेंगी, तो उनका रेप होगा। मुझे लगता है कि एक महिला के रूप में जन्म लेना एक अभिशाप है, खासकर एक गरीब महिला के रूप में। स्थिति इतनी दुखद है कि मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।’

‘झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाली महिलाओं के साथ…’
नीना यहीं नहीं रुकीं, और फिर बोलीं, ‘जब मैं वास्तविक स्थिति जानती हूं, तो मैं आशावादी बातें कैसे कह सकती हूं? यह एक अभिशाप है। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाली महिलाओं के साथ क्या होता है? मैं समाधान चाहती हूं, लेकिन मुझे कोई समाधान नहीं सूझ रहा है।’

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