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देहरादून के ‘मियांवाला’ का नाम बदलने पर राजपूत क्यों नाराज हुए? धामी सरकार ने मुगलों से जोड़ दिया

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देहरादून:

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के मियांवाला इलाके के लोग परेशान हैं। ये इलाका ज्यादातर राजपूत समुदाय के लोगों का है। सीएम पुष्कर सिंह धामी इस इलाके का नाम बदलकर रामजीवाला करना चाहते हैं। लेकिन, यहां के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस जगह का इतिहास सदियों पुराना है। ये नाम तो तब से है, जब देहरादून घाटी में लोग बसे भी नहीं थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि मियांवाला शब्द का मुस्लिम शासकों से कोई लेना-देना नहीं है।

मुख्यमंत्री धामी ने राज्य के 15 इलाकों के नाम बदलने की बात कही है। मियांवाला उनमें से एक है। यहां के लोगों का कहना है कि मियांवाला में जो ‘मियां’ शब्द है, वो उर्दू का शब्द नहीं है। बल्कि, ये राजपूत समुदाय के लोगों को दिया जाने वाला एक टाइटल था। कुछ परिवारों में तो ये टाइटल आज भी इस्तेमाल होता है। इसलिए इस जगह का नाम मियांवाला पड़ा।

जे एस पंवार नाम के एक निवासी ने कहा कि इस नाम का मुगलों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, “17वीं सदी में गढ़वाल के राजा फतेह शाह ने गुरु राम राय को तीन गांव दिए थे। गुरु राम राय, 7वें सिख गुरु हर राय के सबसे बड़े बेटे थे। उन्होंने दून घाटी में अपना डेरा जमाया था। बाद में उन्हें चार और गांव दिए गए, जिनमें मियांवाला भी शामिल था। गढ़वाल के राजाओं, हमारे पूर्वजों ने इस इलाके को अपनी ताकत से बचाया था। इसलिए इस इलाके के इतिहास को किसी के राजनीतिक फायदे के लिए खराब नहीं किया जाना चाहिए।

79 साल की कमला देवी भी यहीं रहती हैं। उन्होंने कहा, “मेरा जन्म मियांवाला में हुआ था, मेरी शादी भी यहीं हुई थी और मैं यहीं शांति से मरना चाहती हूं। बचपन से हमने यहां के राजपूतों की बहादुरी की कहानियां सुनी हैं। अगर हम अब नाम बदल देंगे, तो मेरी परपोतियां कभी भी असली इतिहास नहीं जान पाएंगी।

यहां के लोगों ने एक कमेटी बनाई है और अधिकारियों से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की गुजारिश की है। महेंद्र बुटोला इस कमेटी के सदस्य हैं। उन्होंने कहा, “हमने मुख्यमंत्री के साथ एक मीटिंग में अपनी आपत्तियां बताईं और हमें आश्वासन दिया गया कि नाम नहीं बदला जाएगा और इलाके का इतिहास नहीं खोएगा।

पहले, प्रदर्शनकारियों ने जिला अधिकारियों को एक ज्ञापन भी सौंपा था। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सभी जरूरी कागजात और जमीन के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। इससे पता चलेगा कि लोगों के दावे सही हैं या नहीं।

इस बीच, स्थानीय लोगों ने रविवार शाम को मियांवाला चौक पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। वे सरकार पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं ताकि सरकार नाम बदलने के फैसले को वापस ले ले। लोग चाहते हैं कि सरकार उनकी बात सुने और इलाके का नाम न बदले।

वे अपने इलाके के पुराने इतिहास को बचाने के साथ ही आने वाली पीढ़ी को भी उनके इलाके के बारे में सही जानकारी मुहैया कराना चाहते हैं। वे किसी भी कीमत पर अपने इलाके का नाम बदलने नहीं देंगे और इसके लिए हर संभव कोशिश करेंगे।

 

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