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Tuesday, June 2, 2026
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‘सुप्रीम कोर्ट को कमजोर करने…’, BJP सांसद निशिकांत दुबे के बयान की कांग्रेस ने की आलोचना

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नई दिल्ली,

कांग्रेस ने शनिवार को भाजपा पर सुप्रीम कोर्ट को जानबूझकर निशाना बनाने और कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि वह पार्टी से केवल यह कह रही है कि वह संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ कानून न बनाए. केंद्र पर निशाना साधते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग, मंत्री और भाजपा सांसद संस्था को कमजोर करने के प्रयास में सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बोल रहे हैं. रमेश ने कहा कि कांग्रेस केवल यह चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट स्वतंत्र और तटस्थ तरीके से काम करे.

उनकी टिप्पणी तब आई जब कांग्रेस नेता से चार बार के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की टिप्पणी के बारे में पूछा गया कि अगर सुप्रीम कोर्ट को कानून बनाना है तो संसद और राज्य विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए.

न्यूज एजेंसी के मुताबिक जयराम रमेश ने कहा, “वे (भाजपा) सुप्रीम कोर्ट को कमजोर करने में व्यस्त हैं. संविधान द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दी गई शक्तियों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. संवैधानिक पदों पर बैठे लोग, मंत्री और यहां तक ​​कि भाजपा सांसद भी सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बोल रहे हैं, जो सिर्फ इतना कह रहा है कि कानून बनाते समय संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ मत जाओ. कांग्रेस चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट स्वतंत्र और तटस्थ रहे और संविधान द्वारा उसे दी गई शक्तियों का सम्मान किया जाए.”

उन्होंने कहा, “लेकिन यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट को निशाना बनाने के लिए जानबूझकर अलग-अलग आवाजें उठ रही हैं. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड, वक्फ कानून के बारे में बात की है, जबकि चुनाव आयोग का मुद्दा उसके समक्ष लंबित है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार ने कुछ ऐसा किया है जो संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है और आप ऐसा नहीं कर सकते.”

नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी द्वारा अपने आरोपपत्र में पूर्व कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम लिए जाने पर रमेश ने इसे झूठ-पत्र करार दिया और कहा कि यह मुद्दा कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक है. लोकसभा में भाजपा के मुखर सदस्यों में से एक निशिकांत दुबे ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को कानून बनाना है तो संसद और राज्य विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए.

उन्होंने पहले एक्स पर हिंदी में एक संक्षिप्त पोस्ट किया और बाद में पीटीआई को दिए गए अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट पर आरोप लगाया कि वह विधायिका द्वारा पारित कानूनों को रद्द करके संसद की विधायी शक्तियों को अपने हाथ में ले रहा है और यहां तक ​​कि राष्ट्रपति को निर्देश दे रहा है, जो कि दुबे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है.दुबे ने पोस्ट में कहा, “अगर सुप्रीम कोर्ट कानून बनाता है तो संसद को बंद कर देना चाहिए.”

उनकी यह टिप्पणी केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दिए गए इस आश्वासन के बाद आई है कि वह वक्फ (संशोधन) अधिनियम के कुछ विवादास्पद प्रावधानों को अगली सुनवाई तक लागू नहीं करेगा, क्योंकि कोर्ट ने उन पर सवाल उठाए थे.सुप्रीम कोर्ट वक्फ कानून में किए गए संशोधनों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसके लिए इस महीने की शुरुआत में संसद ने विधेयक पारित किया था.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी न्यायपालिका द्वारा राष्ट्रपति के लिए निर्णय लेने और “सुपर संसद” के रूप में कार्य करने के लिए समयसीमा निर्धारित करने पर सवाल उठाया था, उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय लोकतांत्रिक ताकतों पर परमाणु मिसाइल नहीं दाग सकता. न्यायपालिका के लिए धनखड़ के कड़े शब्द राज्यसभा के प्रशिक्षुओं को दिए गए उनके भाषण के दौरान आए, कुछ दिनों पहले सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति द्वारा उनके विचार के लिए आरक्षित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समयसीमा तय करने की मांग की थी.

धनखड़ ने कहा, “इसलिए, हमारे पास ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून बनाएंगे, जो कार्यकारी कार्य करेंगे, जो सुपर संसद के रूप में कार्य करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है.”

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