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उपराष्ट्रपति धनखड़ और बीजेपी सांसद दुबे की न्यायपालिका को लेकर टिप्पणी पर कानूनी जानकारो ने भी खूब सुनाया

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नई दिल्ली:

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की न्यायपालिका के खिलाफ टिप्पणियों पर कानूनी विशेषज्ञों ने रिएक्ट किया है। उन्होंने इन कमेंट्स की निंदा करते हुए और इसे गैरजिम्मेदाराना बताया है। कानूनी एक्सपर्ट्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को बरकरार रखा जाना चाहिए। धनखड़ ने न्यायपालिका की ओर से राष्ट्रपति के निर्णय लेने के लिए समयसीमा निर्धारित करने और ‘सुपर संसद’ के रूप में कार्य करने को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने गुरुवार को कहा था कि सुप्रीम कोर्ट लोकतांत्रिक ताकतों पर ‘परमाणु मिसाइल’ नहीं दाग सकता।

बयान पर नहीं थम रहा बवाल
उपराष्ट्रपति की टिप्पणी के बाद, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने शनिवार को शीर्ष अदालत पर निशाना साधते हुए कहा था कि कानून अगर उच्चतम न्यायालय ही बनाएगा तो संसद भवन बंद कर देना चाहिए। निशिकांत दुबे ने भारत में धर्म के नाम पर हिंसा के लिए भी सीजेआई संजीव खन्ना को जिम्मेदार ठहराया था। दुबे की टिप्पणी केंद्र की ओर से कोर्ट को दिए गए इस आश्वासन के बाद आयी कि वह वक्फ (संशोधन) अधिनियम के कुछ विवादास्पद प्रावधानों को अगली सुनवाई तक लागू नहीं करेगा।

न्यायपालिका सर्वोच्च है- मनन मिश्रा
बीजेपी सांसद की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि न्यायपालिका सर्वोच्च है और सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और मर्यादा को बरकरार रखा जाना चाहिए। मनन मिश्रा ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष ने इस विवाद पर पूर्ण विराम लगा दिया है। न्यायपालिका सर्वोच्च है। सुप्रीम कोर्ट ने जो भी आदेश पारित किया है, वह अंतिम है और अनुच्छेद 142 के तहत शीर्ष अदालत को किसी भी मामले में पूर्ण न्याय करने का अधिकार है।

बीजेपी ने निशिकांत दुबे की टिप्पणी से बनाई दूरी
मनन मिश्रा ने कहा कि अगर कोई असंतुष्ट है, तो समीक्षा की गुंजाइश है। ऐसे मुद्दों पर सड़कों पर चर्चा नहीं की जानी चाहिए और उच्चतम न्यायालय की गरिमा को बनाए रखा जाना चाहिए। बीजेपी ने हालांकि, निशिकांत दुबे की टिप्पणियों से दूरी बना ली। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इन टिप्पणियों को दुबे का निजी विचार बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के अभिन्न अंग के रूप में न्यायपालिका का पार्टी सम्मान करती है।

‘हर संस्था का सम्मान किया जाना चाहिए’
धनखड़ के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि उच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए और हर संस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद की टिप्पणियों के बारे में विकास सिंह ने कहा कि अगर वह कोई उपाय चाहते हैं तो वे पुनर्विचार याचिका दायर कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जो कुछ भी कहा है वह अंतिम है और आपको उसका सम्मान करना चाहिए। यही कानून का नियम है। उनके पास यह कहने का कोई आधार नहीं है कि भारत के प्रधान न्यायाधीश दंगों के लिए जिम्मेदार हैं। दंगे, सुनवाई शुरू होने से पहले ही प्रारंभ हो गए थे।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ने क्या कहा
वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में 11 और 12 अप्रैल को मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज, सुती, धुलियान और जंगीपुर इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग विस्थापित हुए हैं। उपद्रवियों ने घरों को जला दिया था और तोड़फोड़ की थी। विकास सिंह ने कहा कि वक्फ संशोधन अधिनियम में सुनवायी शुरू होने के बाद दंगे नहीं हुए। सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद ही दंगे रोकने में सहायक हुई।

उपराष्ट्रपति के बयान पर भी घमासान तेज
अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने कहा कि चूंकि धनखड़ एक संवैधानिक पद पर हैं, इसलिए उन्हें न्यायपालिका को निशाना बनाने वाली टिप्पणियां करने से परहेज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में, प्रत्येक इकाई (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) की स्पष्ट और सीमांकित भूमिका होती है और उन्हें अन्य का सम्मान करना चाहिए। उपराष्ट्रपति का पद संवैधानिक होने के नाते, उन्हें ऐसी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए।

बीजेपी सांसद की टिप्पणी पर, शीर्ष अदालत के अधिवक्ता ने कहा कि हिंसा के लिए उच्चतम न्यायालय और भारत के प्रधान न्यायाधीश पर आरोप लगाना पूरी तरह से गलत होगा। देश के लोगों को न्यायपालिका पर भरोसा है। बीजेपी नेतृत्व ने निशिकांत दुबे के बयान से दूरी बना कर सही किया है।

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