16.4 C
London
Tuesday, June 2, 2026
Homeराजनीतिसंसद ही 'सुप्रीम' इससे ऊपर कोई नहीं… निशिकांत दुबे विवाद के बीच...

संसद ही ‘सुप्रीम’ इससे ऊपर कोई नहीं… निशिकांत दुबे विवाद के बीच उपराष्ट्रपति धनखड़ का बड़ा बयान

Published on

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट बनाम संसद के बीच शक्तियों को लेकर बयानबाजी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट को ही कानून बनाना है तो संसद को बंद कर देना चाहिए। अब इस मुद्दे को लेकर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक बार फिर टिप्पणी की है। उपराष्ट्रपति ने मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में कहा कि संसद सर्वोच्च है और चुने हुए प्रतिनिधि ही ‘असली मालिक’ हैं। संवैधानिक पद पर बैठे हर व्यक्ति का प्रत्येक शब्द देश के हित में होता है।

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि संसद सबसे ऊपर है। संविधान की प्रस्तावना में ही इसका सार है। संविधान कहता है ‘हम, भारत के लोग’। इसका मतलब है कि सबसे बड़ी शक्ति लोगों के पास है। कोई भी भारत के लोगों से ऊपर नहीं है।

लोग प्रतिनिधियों को ही ठहराते हैं जवाबदेह
जगदीप धनखड़ ने आगे कहा कि भारत के लोगों ने संविधान के तहत अपने प्रतिनिधियों को चुना है। ये प्रतिनिधि ही लोगों की इच्छा और आकांक्षाओं को व्यक्त करते हैं। लोग चुनावों के दौरान इन प्रतिनिधियों को जवाबदेह ठहराते हैं। चुने हुए प्रतिनिधि ही संविधान के असली मालिक हैं। वे ही तय करते हैं कि संविधान में क्या लिखा जाएगा।

चुनावों में दिखती है लोकतंत्र की शक्ति
धनखड़ ने जोर देकर कहा कि संविधान में संसद से ऊपर कोई नहीं है। संसद उतनी ही सर्वोच्च है, जितना कि देश का हर व्यक्ति। ‘हम, भारत के लोग’ में हर व्यक्ति लोकतंत्र का एक परमाणु है। इस परमाणु में शक्ति है। यह शक्ति चुनावों में दिखती है। इसलिए हम एक लोकतांत्रिक देश हैं।

संविधान में संतुलन की बात: RJD
विपक्ष ने उपराष्ट्रपति के इस बयान की आलोचना करते हुए उन्हें एक बार फिर संविधान सभा की बहसों को देखने की सलाह दी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और राज्यसभा सांसद ने कहा कि उपराष्ट्रपति एक सम्मानित संवैधानिक पद पर हैं। संविधान में न्यायपालिका और विधायिका के बीच संतुलन की बात की गई है। संविधान ही हमारा सबसे बड़ा मार्गदर्शक है।

कपिल सिब्बल ने भी जताई असहमति
राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने भी धनखड़ से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कुछ भी कहा है, वह देश के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है। यह राष्ट्रीय हित में है। सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संसद के पास कानून बनाने की पूरी शक्ति है। सुप्रीम कोर्ट का कर्तव्य है कि वह संविधान की व्याख्या करे और पूरी तरह से न्याय करे।

राष्ट्रपति को निर्देश के बाद शुरू हुई बहस
उपराष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर आपत्ति जताई थी, जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपालों को विधेयकों पर फैसला लेने के लिए समय सीमा तय की गई थी। धनखड़ ने कहा था कि हम ऐसी स्थिति नहीं रख सकते, जहां आप भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें।

Latest articles

छत्तीसगढ़ में पीएम आवास और पीएम सूर्य घर योजना का अभिनव संगम: सीएम विष्णु देव साय ने कोंडागांव में कराया गृह प्रवेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत कोंडागांव...

राजस्थान आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई: एक महीने के विशेष अभियान में ₹3.93 करोड़ की विदेशी शराब जब्त, 5.62 लाख लीटर वॉश नष्ट; 922...

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रदेश में अवैध मदिरा के निर्माण, भंडारण, परिवहन और...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिली नई गति

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी विजन और सकारात्मक सोच के चलते राजस्थान में...

More like this

भेल में अत्याधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणालियों का उद्घाटन— ईडी ने किया शुभारंभ

भोपाल। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) भोपाल के कार्यपालक निदेशक (ईडी) पीके उपाध्याय ने...

एक जिला एक उत्पाद’ नीति से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने...

1 अप्रैल से भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा, 740 लोकेशन पर बढ़ेगी कलेक्टर गाइड लाइन

भोपाल राजधानी भोपाल में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा। जिले की कुल...