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Thursday, May 7, 2026
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गुरुग्राम की मेयर ने बनाया पति को सलाहकार, कांग्रेस ने BJP पर कसा तंज, जाति को लेकर भी विवाद, जानें सबकुछ

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चंडीगढ़/गुरुग्राम

दिल्ली से सटे गुरुग्राम बीजेपी नेता राजरानी मल्होत्रा के गुरुग्राम के मेयर बनने के बाद से उनकी जाति पर विवाद शुरू हो गया था। अब उनके पति को सलाहकार नियुक्त होने पर राजनीति गरमा गई है। राजरानी मल्होत्रा ने अपने पति तिलक राज मल्होत्रा को अपना सलाहकार नियुक्त किया है, जिस पर कांग्रेस ने आपत्ति जाहिर की है। इसके अलावा कांग्रेस के कई नेताओं ने मेयर पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र इस्तेमाल कर चुनाव लड़ने का आरोप लगाया है। गुरुग्राम नगर निगम के आयुक्त अशोक गर्ग ने 21 अप्रैल को एक आदेश जारी किया। इस आदेश में तिलक राज मल्होत्रा को मेयर राजरानी का सलाहकार नियुक्त किया गया।

आदेश में क्या लिखा है?
आदेश में लिखा था कि यह नियुक्ति नगर निगम गुरुग्राम की मेयर के अनुरोध पर की गई है। आदेश के मुताबिक तिलक राज मल्होत्रा मेयर की ओर से समय-समय पर सौंपे गए मामलों में उनकी मदद करेंगे। यह भी स्पष्ट किया गया कि यह नियुक्ति पूरी तरह से मानद और स्वैच्छिक है। तिलक राज को इस काम के लिए कोई पैसा नहीं मिलेगा। कांग्रेस ने मेयर राजरानी के इस फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस नेता पर्ल चौधरी ने इसे भारतीय संविधान का मजाक बताया है। उन्होंने कहा कि जब आप महिलाओं को राजनीतिक जगह देते हैं, तो उनके पास भाग लेने की शक्ति भी होनी चाहिए। क्या बीजेपी को अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं में से मेयर के लिए कोई उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिला? उन्होंने ऐसी महिला को क्यों चुना, जो अपने पति को सलाहकार बनाएगी? बता दें कि पंचायती राज्य मंत्रालय ने ‘प्रधान पति’, ‘सरपंच पति’ या ‘मुखिया पति’ जैसे प्रॉक्सी नेतृत्व को रोकने की सिफारिश की थी। कांग्रेस इस फैसले को मेयरपति के तौर पर प्रचारित कर रही है।

मल्होत्रा ने हासिल की थी बड़ी जीत
2 मार्च को हुए चुनाव में राजरानी मल्होत्रा ने कांग्रेस की सीमा पाहूजा को लगभग 1.5 लाख वोटों से हराया था। उनके समर्थन में सीएम नायब सिंह सैनी और प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडोली के अलावा राव इंद्रजीत सिंह और राव नरबीर सिंह जैसे बड़े नेताओं ने ताकत झोंकी थी। राजरानी के परिवार का आरएसएस से लंबा रिश्ता रहा है। बीजेपी ने उन्हें इसलिए चुना क्योंकि वह पंजाबी ओबीसी समुदाय से हैं। 9 अप्रैल को यशपाल प्रजापति और कुछ अन्य लोगों ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राजरानी ओबीसी-A कैटिगरी से नहीं हैं, जिसके लिए मेयर की सीट रिजर्व थी। याचिका में कहा गया कि मल्होत्रा वास्तव में जाट समुदाय से हैं, लेकिन उन्होंने गलत तरीके से खुद को सुनार बताया है। गुरुग्राम नगर निगम का सालाना बजट 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। राजरानी मल्होत्रा का कार्यकाल 2030 में खत्म होगा। अभी तक सलाहकार नियुक्ति और जाति संबंधी विवाद पर मेयरराज रानी मल्होत्रा या उनके पति की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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