भीलवाड़ा:
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के कोटडी गांव में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। पुलिस की सख्ती के बावजूद, यहां 5 नाबालिग लड़कियों की शादी करा दी गई। यह शादियां चोरी-छिपे खेतों में की गईं। प्रशासन और पुलिस बाल विवाह रोकने की पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन परिवार वाले खेत में शादी करने में सफल रहे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
SHO की शिकायत पर मामला दर्ज
कोटडी थाने के SHO ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने गोपाल पुत्र भैंरू गाडरी और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि नाबालिग लड़कियों में से 4 गोपाल की बेटियां हैं और एक उसकी भांजी है। सदर थाने के हेड कांस्टेबल जय प्रकाश शर्मा इस मामले की जांच कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह शिकायत कोटडी थाना प्रभारी महावीर प्रसाद ने दर्ज कराई है। शिकायत में नाबालिग जोड़ों के मंदिर में धोक लगाने की बात कही गई है।
गोकलपुरा गांव के कहने वाले पांच जोड़े
कोटडी पुलिस की रिपोर्ट और शुरुआती जांच से पता चला है कि सभी पांच जोड़े गोकलपुरा गांव के हैं। मामले की जांच जारी है। हेड कांस्टेबल जय प्रकाश शर्मा का कहना है कि बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों को मिलकर इस समस्या पर काम करना होगा, ताकि बाल विवाह जैसी बुरी प्रथा को रोका जा सके।
अबूझ सावे के दौरान पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि बाल विवाह रोकने के लिए अबूझ सावे (वह दिन जब बिना मुहूर्त देखे शादी होती है) के दौरान प्रशासन ने बहुत सख्ती की थी। सामाजिक संस्थाओं और NGO (गैर-सरकारी संगठन) ने जागरूकता अभियान चलाया था। गांवों में संभावित जगहों पर निगरानी भी रखी गई थी। लेकिन, इतना सब करने के बाद भी बाल विवाह करने वालों ने खेतों में शादियां कर लीं।
बूंदी जिले में भी हुई थी कार्रवाई
इससे पहले, बूंदी जिले में भी अक्षय तृतीया पर सबसे बड़ी कार्रवाई की गई थी। वहां 14 बाल विवाह रुकवाए गए थे। अक्षय तृतीया से पहले प्रशासन ने गेंडोली, रायथल, इंदरगढ़ और बसौली थाना क्षेत्रों में छापेमारी की। इन बाल विवाहों पर कोर्ट से रोक (स्टे) जारी करवा दिया गया था। इस कार्रवाई से ग्रामीण इलाकों में हड़कंप मच गया था। यह बाल विवाहों के खिलाफ प्रशासन और पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई थी। बाल विवाह रोकने के इस अभियान में धर्मगुरुओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रामराज्य विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान ने ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ नेटवर्क के तहत अलग-अलग धर्मों के पुजारियों के बीच जागरूकता अभियान चलाया, जो बहुत सफल रहा।
