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भारत के हमलों से बचाई पाकिस्तान की जान, तुर्की को मिसाइलों का इनाम, धोखेबाज ट्रंप की ब्लैकमेलिंग पर एक्सपर्ट ने पूछे तीखे सवाल

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वॉशिंगटन:

पहलगाम आतंकी हमला इंसानियत पर किए गए सबसे क्रूर आतंकी हमलों में से एक था। जिसमें भारत के 26 पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर मार दिया गया। पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों ने भारत की सहनशीलता की परीक्षा ली थी, जिसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। जिसमें पाकिस्तान में स्थिति कम से कम 9 आतंकी ठिकानों पर भारत ने एयरस्ट्राइक किए। जिसके बाद आतंकियों का पक्ष लेते हुए पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया और भारत ने फिर से जवाबी कार्रवाई की। 10 मई की सुबह भारत ने निर्णायक बढ़त बना ली थी। नूर खान एयरबेस पर हमले का मतलब था कि भारत ने रावलपिंडी के दरवाजे खोल दिए थे। लेकिन इसी समय वॉशिंगटन से एक फोन आया और युद्धविराम हो गया। डोनाल्ड ट्रंप के शासनवाले अमेरिका ने एक बार फिर से आतंकवाद के खिलाफ एक सख्त कार्रवाई को रोक दिया।

डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक धमकी दी थी कि ‘अगर आपने युद्ध नहीं रोका तो हम आपके साथ ट्रेड डील खत्म कर देंगे।’ भारत के जियो-पॉलिटिकल स्ट्रैटजिस्ट ब्रह्मा चेलानी ने इसे डिप्लोमेसी नहीं, बल्कि आर्थिक ब्लैकमेल बताया है। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद माना है कि “उन्होंने बिलियन डॉलर की ट्रेड डील रोकने की धमकी दी और उसी शाम 5 बजे (अमेरिकी समय के मुताबिक) भारत को युद्धविराम के लिए मजबूर किया। ब्रह्मा चेलानी ने लिखा है कि “डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हस्तक्षेप करके भारत को समय से पहले अपना अभियान बंद करने के लिए मजबूर किया। ट्रंप ने न ऐसा करके ना सिर्फ पाकिस्तान को उसके कार्यों के परिणामों से बचाया, बल्कि अमेरिका-भारत रणनीतिक विश्वास की नींव को भी नुकसान पहुंचाया है।”

डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका ने भारत को दिया धोखा!
डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम का क्रेटिड लिया, सार्वजनिक तौर पर शेखी बघारी। मध्य पूर्व के दौरे पर पहुंचे ट्रंप ने रियाद से दोहा तक दोहराया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच “ऐतिहासिक युद्ध विराम” करवाया है। लेकिन ट्रंप के इस घोषणा के पीछ एक कड़वा सच छिपा है। ब्रह्मा चेलानी ने लिखा है कि “अमेरिकी हस्तक्षेप शांति के लिए नहीं था, बल्कि यह एक लंबे समय से “प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी” को उसके छद्म युद्ध के नतीजों से बचाने के लिए था।” उन्होंने लिखा है कि “भारत का अभियान सिर्फ तीन दिनों तक चला जो आधुनिक सैन्य अभियानों में सबसे छोटा था, फिर भी भारत ने महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की। भारतीय सेना ने पाकिस्तान की हवाई सुरक्षा को कमजोर कर दिया और प्रमुख हवाई ठिकानों पर हमला किया। तकनीकी कौशल का प्रदर्शन करते हुए, दोनों देशों ने ड्रोन और सटीक मिसाइलों पर बहुत ज्यादा भरोसा किया। लेकिन पाकिस्तान ने काफी ज्यादा प्रोजेक्टाइल लॉन्च करने के बाद भी वह किसी भी भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाने में नाकाम रहा।”

ट्रंप ने बार बार कहा है कि उन्होंने भारत को कारोबार रोकने की धमकी दी और ब्रह्मा चेलानी ने लिखा है कि “यदि सच है, तो आतंकवाद का निर्यात करने वाले राज्य की रक्षा के लिए अमेरिका ने कूटनीति नहीं, बल्कि आर्थिक ब्लैकमेल का लाभ उठाया। इससे एक भयावह प्रश्न उठता है कि यदि वाशिंगटन सैन्य संकट में भारत को रोकने के लिए व्यापार रोकने की धमकी दे सकता है, तो अगले संकट के दौरान रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को हथियार बनाने से उसे कौन रोक सकता है?” उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिकी सैन्य हार्डवेयर खरीदने में लगातार इजाफा किया है, लेकिन ट्रंप की इस धमकी के बाद सबसे बड़ा डर ये बनकर उभरा है कि “वास्तविक संघर्ष के दौरान अगर वाशिंगटन नल बंद कर देता है, तो ये डिफेंस सिस्टम किसी काम के नहीं रहेंगे। लिहाजा किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा किसी अन्य शक्ति की राजनीतिक सनक पर निर्भर मंचों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।”

पाकिस्तान और भारत के दुश्मन को इनाम
उन्होंने लिखा है कि “भारत के सैन्य अभियान के दो दिन बाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अमेरिका के मजबूत प्रभाव की वजह से पाकिस्तान के लिए 2.4 बिलियन डॉलर के बेलआउट को मंजूरी दे दी, जो डिफॉल्ट के कगार पर खड़े देश को वित्तीय जीवन रेखा प्रदान करता है। बेलआउट का समय बता रहा था, दक्षिण एशिया में सबसे लगातार आतंकवाद प्रायोजक को अवार्ड दिया दिया है।” उन्होंने लिखा है कि “बेलआउट ने दुनिया को संकेत दिया कि आप जिहादी आतंक का निर्यात कर सकते हैं और फिर भी पश्चिमी संरक्षण का आनंद ले सकते हैं, यदि आप भू-राजनीतिक रूप से उनके लिए उपयोगी हैं।” इस घटना के सिर्फ 4 दिन बाद ट्रंप ने सीरिया में अल-कायदा से जुड़े आतंकवादी अबू मोहम्मद अल-जोलेनी से मुलाकात की। यानि जिस शख्स को यूनाइटेड नेशंस और खुद अमेरिका आतंकवादी ठहरा चुका है, ट्रंप ने उससे मुलाकात की, जिससे साफ संदेश मिलता है कि “एक तरफ ट्रंप भारत की कार्रवाई रोक रहे थे, दूसरी तरफ आतंकियों से हाथ मिला रहे थे।”

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