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उड़ नहीं पाएगा फाइटर F-35, फुस्स हो जाएगी मिसाइल… अमेरिका को क्यों आंखें दिखा रहा है चीन?

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नई दिल्ली

दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। दोनों देशों के बीच हाल में एक ट्रेड डील हुई थी। इसके तहत दोनों ने एकदूसरे पर हाल में लगाए गए टैरिफ में भारी कटौती की थी। लेकिन कुछ ही दिनों में अमेरिका और चीन के बीच फिर तनातनी बढ़ने लगी है। चीन का कहना है कि अमेरिका इस डील को लेकर गंभीर नहीं है और इसका उल्लंघन कर रहा है। चीन ने अमेरिका चिप एक्सपोर्ट कंट्रोल को एडजस्ट कर रहा है। उसके अपनी गलतियों को दुरुस्त करना चाहिए। साथ ही उसने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने मनमानी की तो वह भी जवाबी कार्रवाई करेगा।

टैरिफ को लेकर अमेरिका और चीन के बीच कई दिनों तक तनातनी चली थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 145 फीसदी टैरिफ लगा दिया था। इसके जवाब में चीन ने अमेरिका के सामान पर 125 फीसदी टैरिफ लगाया था। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हाल में जेनेवा में एक डील हुई थी। इसके तहत दोनों ने एकदूसरे पर टैरिफ में कटौती की है। यह व्यवस्था फिलहाल 90 दिनों के लिए है। लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी लगातार बनी हुई है और इसे देखते हुए इस डील के ज्यादा दिन तक टिकने की उम्मीद नहीं है।

रेयर अर्थ की वैल्यू
मसलन चीन रेयर अर्थ के निर्यात पर नियंत्रण बनाए हुए है। यह अमेरिका के साथ भविष्य में होने वाली बातचीत में चीन के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार है। पिछले हफ्ते जेनेवा में हुई ट्रेड डील के तहत चीन ने अमेरिका पर लगाए गए गैर-टैरिफ उपायों को हटाने का वादा किया था। अब कंपनियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि यह वादा रेयर अर्थ खनिजों पर भी लागू होता है या नहीं। चीन ने 4 अप्रैल को इन खनिजों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाया था। रेयर अर्थ तत्वों से बने चुंबक बहुत जरूरी हैं। इनका इस्तेमाल आईफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, F-35 जैसे लड़ाकू विमान और मिसाइल सिस्टम में होता है। इनकी आपूर्ति पर चीन का पूरी तरह से नियंत्रण है।

सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक जेनेवा में व्यापार वार्ता से लौटने के बाद अमेरिका के ट्रेड रिप्रजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने इस बारे में चिंता कम करने की कोशिश की। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि चीन ने रेयर अर्थ पर निर्यात प्रतिबंध हटाने पर सहमति जताई है। ग्रीर ने कहा कि चीन उन उपायों को हटाने के लिए सहमत हो गया है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो स्थिति बदल जाएगी। हालांकि ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि चीन ने अपने नए निर्यात नियंत्रण को हटाया है। विशेषज्ञों और उद्योग के लोगों का कहना है कि चीनी अधिकारी इसे और भी मजबूत कर रहे हैं।

चीन की चाल
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) में क्रिटिकल मिनरल्स सिक्योरिटी प्रोग्राम की डायरेक्टर ग्रेसलिन भास्करन ने कहा कि चीन की निर्यात लाइसेंसिंग व्यवस्था लंबे समय तक रह सकती है। इससे बीजिंग को अमेरिका के साथ भविष्य में होने वाली व्यापार वार्ता में फायदा मिलेगा। इससे चीन को यह तय करने की पावर मिलती है कि कौन सी कंपनियां या देश उसके रेयल अर्थ खनिजों और चुंबकों तक पहुंच सकते हैं।

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