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असली जीत तो चीन की हुई… भारत-पाकिस्तान की लड़ाई में ड्रैगन उठा गया फायदा, जानें कैसे कर सकता है तगड़ी कमाई

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बीजिंग

भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों के सैन्य संघर्ष ने दुनिया का ध्यान खींचा है। 6 मई की रात को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर हमले की कोशिश की और दोनों देश युद्ध जैसी स्थिति में आ गए। 10 मई के सीजफायर के बाद दोनों देशों ने अपने-अपने दावे किए हैं। भारत और पाकिस्तान के इस संघर्ष में चीन का नाम भी तेजी से सामने आया है। चीन को कुछ एक्सपर्ट इस संघर्ष के ‘असली विजेता’ की तरह भी देख रहे हैं।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-पाक के हालिया संघर्ष से चीन के रक्षा उद्योग को अप्रत्याशित रूप से लाभ हुआ है। इसकी वजह ये है कि पाकिस्तान ने इस लड़ाई में चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया है। इससे चीन के हथियार उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है। खासतौर से चीनी लड़ाकू विमानों के लिए इस संघर्ष को फायदे का सौदा कहा जा रहा है।

हवाई लड़ाई में दिखाई ताकत
भारत और पाकिस्तान की ओर से चार दिन के संघर्ष में ड्रोन, मिसाइल और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। भारत ने फ्रांस और रूस में बने विमानों का इस्तेमाल किया। वहीं पाकिस्तान ने चीन से मिले J-10 और J-17 विमानों को मैदान में उतारा। हालांकि दोनों देशों ने ये कहा है कि उनके विमानों ने सीमा पार नहीं की बल्कि अपने हवाई क्षेत्र से ही मिसाइलें दागीं।

भारत-पाक संघर्ष को कुछ रक्षा विशेषज्ञों ने चीनी हथियार उद्योग के लिए ‘डीपसीक मोमेंट’ कहा है। बीजिंग के विश्लेषक झोउ बो ने बीबीसी से कहा कि हवाई लड़ाई चीनी हथियार उद्योग के लिए एक बड़ा विज्ञापन थी। अभी तक चीन को अपने हथियारों को युद्ध में आजमाने का मौका नहीं मिला था। इस लड़ाई में शामिल ना होकर भी जरिए चीन ने अपनी ताकत दिखाई है।

चीनी हथियारों की बढ़ी ‘कीमत’
भारत-पाकिस्तान संघर्ष में J-10 लड़ाकू विमानों से जुड़ी न्यूज रिपोर्ट्स से चीनी विमान निर्माता कंपनी चेंगदू एयरक्राफ्ट को फायदा हुआ और उसके शेयरों में तेजी आई। हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी हथियारों को श्रेष्ठ कहना जल्दबाजी है। लंदन के किंग्स कॉलेज के प्रोफेसर वाल्टर लैडविग कहते हैं, ‘अभी यह तय नहीं हुआ है कि चीनी विमानों ने इस संघर्ष में बढ़त हासिल की है।’

वेरोना में इंटरनेशनल टीम फॉर द स्टडी ऑफ सिक्योरिटी की शोधकर्ता कार्लोटा रिनाउडो का कहना है कि चीनी सोशल मीडिया पर ऐसे संदेशों की बाढ़ आ गई है, जो भारत-पाक संघर्ष में चीनी हथियारों की तारीफ कर रहे हैं। ये सही है कि उपलब्ध जानकारी के साथ किसी निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है लेकिन माहौल ऐसा है कि चीन ही विजेता बना है।

चीन को मिलेंगे हथियारों के नए खरीदार!
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-पाक के इस संघर्ष का वैश्विक हथियार व्यापार पर प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है, जबकि चीन चौथे स्थान पर है। चीन अभी तक म्यांमार और पाकिस्तान जैसे देशों को हथियार बेचता रहा है। चीनी हथियार प्रणालियों की तकनीकी समस्याओं के लिए आलोचना होती रही है लेकिन अब बीजिंग के हथियारों पर ऐसे देशों का विश्वास बन सकता है, जो अभी तक अमेरिका या पश्चिम की ओर देखते रहे हैं। ऐसा होता है तो चीन रक्षा क्षेत्र में तगड़ी कमाई कर सकता है।

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