मास्को
भारत और रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है। सोवियत जमाने में पाकिस्तान और चीन के खिलाफ लड़ाई के दौरान सोवियत संघ ने भारत की मदद की थी। पाकिस्तान की मदद के लिए आए अमेरिका को रोकने के लिए सोवियत संघ ने अपने युद्धपोत तक हिंद महासागर में भेज दिए थे। इससे दोनों के बीच दोस्ती मजबूत हुई जो आज भी चल रही है। भारत रूस से आज भी करीब 60 फीसदी हथियार खरीदता है। भारत ने भी यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस की खुलकर मदद की। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भी भारत ने रूस से अरबों डॉलर का तेल खरीदा और हथियारों की खरीद को जारी रखा है। यूक्रेन युद्ध के बाद चीन के जूनियर पार्टनर बन चुके रूस का सरकार नियंत्रित मीडिया ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने में जुट गया है। आइए समझते हैं पूरा मामला…
रूस के टीवी चैनल RT ने अपने सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर जेट को बेचने के लिए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फ्रांस के बने राफेल की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। वह भी तब जब भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान तरह-तरह की फर्जी न्यूज को बढ़ावा दे रहा है। रूसी आरटी चैनल ने इंडोनेशिया के 42 राफेल फाइटर जेट को खरीदने पर संदेह को हवा दिया जिसे पाकिस्तानी भी बढ़ावा दे रहे थे। वहीं आरटी ने रूस के सुखोई-57ई फाइटर जेट को राफेल का बेहतर विकल्प बताया जिसे वह इंडोनेशिया और भारत को बेचने के लिए दिन रात एक किए हुए है।
रूस को सता रहा है राफेल डील से डर!
इससे आरटी के मंसूबे को लेकर सवाल उठ रहा है। क्या आरटी एक तटस्थ पर्यवेक्षक है या रणनीतिक खिलाड़ी है जो पत्रकारिता के नाम पर रूस के हितों को बढ़ावा दे रहा है। इंडोनेशिया अपनी एयरफोर्स को आधुनिक बनाना चाहता है और इसी वजह से वह करीब 8 अरब डॉलर में 42 राफेल फाइटर जेट फ्रांस से खरीदने पर विचार कर रहा है। इस बीच भारतीय राफेल और चीन के बने जे-10सी में टक्कर के बाद पाकिस्तानियों ने यह कहना शुरू कर दिया कि इंडोनेशिया इस राफेल डील को रद कर सकता है। पाकिस्तान के इस दावे को आरटी ने भी हवा देना शुरू कर दिया।
रूसी मीडिया ने कथित सूत्रों के हवाले से राफेल के प्रभावी होने पर भी सवाल उठा दिया। यह वही दावा है जिसे पाकिस्तान बढ़ा रहा है। यह वही राफेल है जिसकी मदद से भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस पर सफलतापूर्वक मिसाइल हमला किया। वही आरटी लगातार अपने सुखोई-57 ई फाइटर जेट को बढ़िया बताने में जुट गया है। रूसी मीडिया का दावा है कि सुखोई-57 पांचवीं पीढ़ी का है और राफेल तथा अमेरिका के एफ-35 से बेहतर है। आरटी इसे दक्षिण पूर्व एशिया के लिए गेमचेंजर बता रहा है। इसके जरिए रूस चाहता है कि उसका हथियारों का पुराना बाजार बना रहे जबकि भारत अब पश्चिम से हथियारों को लेने पर भी फोकस कर रहा है। भारत और इंडोनेशिया दोनों ही पुराने पड़ चुके सुखोई फाइटर जेट को अभी उड़ा रहे हैं।
