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ट्रंप ने दिया नया धोखा… 40 साल से रह रहे भारतीयों को भी अमेरिका से जाना पड़ सकता है, पाकिस्तान है वजह!

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वॉशिंगटन

भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पहले और बाद में अमेरिका एक बार फिर तेवर दिखा रहा है। वह अक्सर कई मौकों पर पाकिस्तान का साथ देता दिखता है। पहले तो उसने अवैध रूप से अमेरिका गए भारतीयों को अपमानजनक रूप से जबरन वापस भिजवाया। फिर भारत पर भारी भरकम टैरिफ और भारत के दुश्मन पाकिस्तान को कथित तौर पर आईएमएफ से कर्ज दिलवाया। यहां तक कि पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति में भी अमेरिका का हाथ माना जा रहा है। इसी अमेरिका में हर साल हजारों भारतीय अपना सपना लेकर जाते हैं। मगर, डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से भारतीयों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। नई मुश्किल एक नए नियम को लेकर है। जानते हैं पूरी कहानी।

अमेरिकी न्याय विभाग की नई करतूत सामने आई
अमेरिका में एक नया कानूनी मामला सामने आया है। इससे हजारों भारतीय ग्रीन कार्ड धारकों पर असर पड़ सकता है। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने एक संघीय अदालत में कहा है कि अटॉर्नी जनरल के पास ये अधिकार है कि वो किसी भी व्यक्ति का ग्रीन कार्ड कभी भी रद्द कर सकता है। भले ही ग्रीन कार्ड जारी हुए कई साल या दशक बीत गए हों। ग्रीन कार्ड को LPR (lawful permanent resident) स्टेटस भी कहते हैं।

ग्रीन कार्ड अब अमेरिका रहने की गारंटी नहीं
ये कानूनी बात न्यू जर्सी के इमाम मोहम्मद कतानी के एक मामले में सामने आई है। कतानी को 2006 में ग्रीन कार्ड देने से मना कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि उनके संबंध एक प्रतिबंधित संगठन से हैं। हालांकि, ये आरोप साबित नहीं हो पाए थे। इस मामले के बाद भारतीय समुदाय समेत कई आप्रवासी समुदायों में डर का माहौल है। लोगों को लग रहा है कि ग्रीन कार्ड अब सुरक्षित नहीं रहा।

ग्रीन कार्ड के नियम में समयसीमा नहीं है
DOJ की वकील लिंडसे मर्फी ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के पास ये अधिकार है कि वो कभी भी ग्रीन कार्ड रद्द कर सकते हैं। अगर प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी तरह से नहीं हुई थी, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ग्रीन कार्ड जारी हुए कितना समय हो गया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या 10 या 20 साल बाद भी ग्रीन कार्ड रद्द किया जा सकता है, तो मर्फी ने कहा कि नियम में कोई समय सीमा नहीं है। यानी 30-40 साल या 50 साल से अमेरिका में रह रहे प्रवासियों को भी इसमें राहत नहीं मिल सकती है।

गलती का भुगतना पड़ सकता है खामियाजा
माना जा रहा है कि अगर डॉक्यूमेंट्स में प्रशासनिक गलतियां पाई जाती हैं, तो ग्रीन कार्ड जारी होने के बाद भी कभी भी रद्द किया जा सकता है। कानूनी विशेषज्ञों ने DOJ के इस रुख पर चिंता जताई है। कतानी के वकील डेविड इसाकसन ने कहा कि सरकार को 30 दिनों के अंदर पहले फैसले के खिलाफ अपील करनी चाहिए थी। अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया, तो पहला फैसला ही मान्य होना चाहिए।

धोखाधड़ी या आपराधिक गतिविधियों में ही रद्द
कॉर्नेल लॉ स्कूल के इमिग्रेशन लॉ के प्रोफेसर स्टीफन येल-लोहर के अनुसार, ग्रीन कार्ड धोखाधड़ी या आपराधिक गतिविधियों जैसे कारणों से रद्द किए जा सकते हैं। लेकिन, सिर्फ तकनीकी गलतियों के आधार पर अनिश्चितकाल के लिए ग्रीन कार्ड रद्द करना पहले कभी नहीं सुना गया। इससे स्थायी निवास की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।

आतंकवाद जैसे मामलों में ही होता था निर्वासन
ग्रीन कार्ड धारकों को अमेरिकी नागरिकों के समान कई अधिकार मिलते हैं, लेकिन कुछ मामलों में उन्हें निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है। आमतौर पर, ये मामले आपराधिक व्यवहार या इमिग्रेशन कानून के उल्लंघन से जुड़े होते हैं। विदेशी नागरिक आतंकवादी समूहों का समर्थन करने या उनसे जुड़े होने पर भी अपना वीजा खो सकते हैं। हालांकि, इसके लिए सरकार को ठोस सबूत पेश करने होते हैं।

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