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भारत-पाक टेंशन के बीच नेपाल से छूटेगा जाली नोटों का किंगपिन, दाऊद के करीबी की रिहाई से बढ़ी चिंता

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अररिया

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है। इस बीच भारतीय जाली नोटों के कारोबार का कुख्यात सरगना यूनुस अंसारी छह साल की सजा पूरी करने के बाद इस रविवार को नेपाल की जेल से रिहा हो जाएगा। वह नेपाल के पूर्व मंत्री सलीम अंसारी का बेटा है। यूनुस अंसारी लंबे समय से अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का करीबी गुर्गा माना जाता रहा है। यूनुस अंसारी और उसके पिता सलीम अंसारी पर आरोप है कि वे दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारत में नकली नोटों के बड़े नेटवर्क को संचालित करते थे। डी कंपनी से इनके संबंध इतने गहरे थे कि एक समय पर पिता-पुत्र की जोड़ी सीधे निर्देशों पर काम करती थी।

पाकिस्तान से सीधा कनेक्शन
यूनुस का सीधा संबंध पाकिस्तान से जुड़ा हुआ था। नकली भारतीय नोटों को पाकिस्तान से नेपाल होते हुए भारत के सीमांचल क्षेत्र सहित कई राज्यों में पहुंचाने की जिम्मेदारी उसी के नेटवर्क पर थी। उसकी रिहाई से एक बार फिर भारत-नेपाल दोनों देशों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।

खुफिया एजेंसियों की निगरानी तेज
यूनुस की रिहाई की सूचना मिलते ही नेपाल की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIB) ने जेल प्रशासन को पत्र भेजा है, जिसमें उसके खिलाफ अवैध संपत्ति की जांच शुरू करने की मांग की गई है। यह संभावना जताई जा रही है कि जेल से छूटने के तुरंत बाद उसे दोबारा गिरफ्तार किया जा सकता है।

गिरफ्तारी और आपराधिक इतिहास
यूनुस अंसारी को पहली बार 28 दिसंबर 2009 को 25 लाख 44 हजार 500 रुपये की नकली भारतीय करेंसी के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय वह न्यूज नेपाल नेशनल नामक टेलीविजन चैनल का अध्यक्ष था। इसके बाद 2010 और 2014 में भी वह भारी मात्रा में नकली नोटों के साथ पकड़ा गया।

24 जून 2019 को यूनुस को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 7 करोड़ 67 लाख 94 हजार नकली भारतीय रुपये के साथ गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद उसे छह साल की सजा और 60 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया।

जेल में रहते हुए भी सक्रिय नेटवर्क
सूत्रों की मानें तो जेल में रहने के बावजूद यूनुस अंसारी अपने नेटवर्क के माध्यम से सीमांचल और भारत के अन्य हिस्सों में जाली नोटों की सप्लाई करता रहा। उसने इसके लिए कई वैकल्पिक रूट विकसित किए और अपने गुर्गों की मदद से नेटवर्क को मजबूत बनाए रखा।

संभावित पुनः गिरफ्तारी
रविवार को सजा पूरी होने के बाद भले ही वह जेल से छूट रहा हो, लेकिन नेपाल की केंद्रीय अनुसंधान ब्यूरो (CIB) उसे अवैध संपत्ति अर्जन के मामले में फिर से गिरफ्तार कर सकती है। यूनुस अंसारी की गतिविधियों को देखते हुए भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।

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