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पाकिस्तान को चीनी सैन्‍य मदद के बावजूद चीन के राष्‍ट्रपति से गले मिल सकते हैं पीएम मोदी

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रियो डी जनेरियो

भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को मिले चीनी सैन्य मदद के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ब्राजील में मुलाकात हो सकती है। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई महीने में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में दोनों नेताओं की मुलाकात संभव है। रिपोर्ट के मुताबिक 17वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच मुलाकात की संभावनों पर चर्चा है। रिपोर्ट है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हो सकती है। हालिया समय में चीन, पाकिस्तान की सैन्य ताकत को लगातार मजबूत कर रहा है और रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने पाकिस्तान एयरफोर्स को तेजी से J-35A स्टील्थ लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करने के लिए प्रोडक्शन को तेज कर दिया है। उसके अलावा चीन ने पाकिस्तान को सैटेलाइट सुविधाओं के साथ साथ पीएल-15 एयर टू एयर मिसाइलें भी सौंपी थी, जिसका पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया था।

माना जा रहा है कि नई दिल्ली का फोकस भारत और चीन के सामान्य होते रिश्तों में पाकिस्तान के मुद्दे को दूर रखने की है। अगर ब्राजील में दोनों नेताओं की बैठक होती है तो पिछले साल 23 अक्टूबर को रूस के कजान शहर में 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद दोनों नेताओं की ये दूसरी मुलाकात होगी। पिछले साल कजान शहर से ही भारत और चीन के रिश्तों को सामान्य करने की कोशिशें शुरू हुई थीं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने का फैसला लिया था, उस दौरान भारत ने बार बार चीन को अपनी स्थिति से अवगत कराया था। भारत की कोशिश संघर्ष से चीन को दूर रखने की थी। हालांकि चीन खुलकर पाकिस्तान के सैन्य समर्थन में नहीं उतरा, लेकिन उसने डिप्लोमेटिक तरीके से पाकिस्तान का पूरा साथ दिया।

ब्राजील में मोदी और शी जिनपिंग की बैठक संभव
पहलगाम आतंकी हमले के बाद करीब 3 हफ्ते के तनावपूर्ण घटनाक्रम के दौरान चीन ने पाकिस्तान को “हर मौसम का साथी” बताते हुए उसके “संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा” में समर्थन देने की बात की। सिर्फ इतना ही नहीं, चीन ने पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन The Resistance Front (TRF) को यूनाइटेड नेशंस में बचाने की कोशिश की, जिसने पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसके अलावा बीजिंग ने जम्मू-कश्मीर में 22 अप्रैल को हुए ‘नरसंहार’ की निष्पक्ष जांच के लिए इस्लामाबाद के आह्वान का भी समर्थन किया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने 7-10 मई को दोनों देशों के बीच झड़प के दौरान भारतीय लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए पीएल-15 मिसाइलें भी दागीं थी। इसके अलावा चीन ने पाकिस्तान एयरफोर्स को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए पाकिस्तान को सैटेलाइट मदद भी दी थी।

हालांकि अगर इन घटनाओं के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी, शी जिनपिंग से मिलने का फैसला करते हैं तो उसका मतलब ये होगा कि भारत BRICS जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों को एक बहुपक्षीय सहयोग के अवसर के रूप में देखता है, और ऐसे मंचों पर चीन से बातचीच को रणनीतिक स्थिरता की दिशा में एक कदम मानता है। यही वजह है कि भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा था कि भारत-चीन संबंध “पारस्परिक विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता” पर आधारित होने चाहिए। वहीं, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से कुछ दिन पहले बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से भी मुलाकात की थी और चीन-पाकिस्तान सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। इस दौरान सीपीईसी 2.0 को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत की गई है।

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