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भारत को चीन विरोधी साजिश के लिए लालच दे रहे… नाटो पर बरसे रूसी विदेश मंत्री, बीजिंग-दिल्‍ली में दोस्‍ती के लिए बड़ा ऐलान

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मास्‍को

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार को भारत और चीन को लेकर नाटो को जमकर सुनाया। लावरोव ने कहा कि नाटो देश चीन विरोधी साजिश में भारत को फंसाने के लिए लालच दे रहे हैं। पुतिन के करीबी लावरोव ने कहा कि रूस ‘पूरी गंभीरता के साथ’ रूस- भारत- चीन (RIC) के फारमेट के तहत बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए इच्‍छुक है। रूसी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पाकिस्‍तान और भारत के बीच 4 दिनों तक सीमित युद्ध हुआ। इसमें चीनी हथियारों का पाकिस्‍तान ने भारत के खिलाफ जमकर इस्‍तेमाल किया था। इसमें पीएल-15 मिसाइल से लैस चीनी जे-10 सी और भारतीय राफेल जेट के टक्‍कर की दुनियाभर में चर्चा हुई।

लावरोव ने एक सम्‍मेलन में कहा, ‘मैं इस बात की पुष्टि करना चाहता हूं कि यह हमारी वास्‍तव में इच्‍छा है कि भारत-चीन और रूस के फारमेट के बीच होने वाले काम को फिर से शुरू करने की इच्‍छा है। इस फारमेट को कई साल पहले पूर्व रूसी पीएम येवगेनी प्रिमाकोव ने शुरू किया था। उसके बाद से करीब 20 बार मंत्री स्‍तर पर मीटिंग हो चुकी है। इसमें न केवल विदेश मंत्री बल्कि तीनों देशों के आर्थिक, व्‍यापार और वित्‍तीय एजेंसियों के प्रमुखों के बीच बैठक शामिल है।’ लावरोव अगले महीने भारत की यात्रा पर आने वाले हैं और इससे ठीक पहले उन्‍होंने यह बयान दिया है।

‘भारत और चीन में समझ पैदा हुई’
लावरोव ने यह भी कहा कि नाटो देश भारत को चीन विरोधी साजिश में शामिल करने के लिए खुलकर लालच दे रहे हैं। रूसी विदेश मंत्री ने कहा, ‘आज के दिन मैं यह समझता हूं कि भारत और चीन के बीच यह समझ पैदा हो गई है कि सीमा पर हालात को कैसे हल्‍का करना है। मुझे यह लगता है कि अब समय आ गया है कि RIC के तहत तीनों देशों के नेताओं की बैठक को फिर से शुरू किया जाए।’ उन्‍होंने नाटो पर चीन विरोधी साजिश का आरोप लगाते हुए कहा, ‘मुझे अपने भारतीय दोस्‍तों पर कोई संदेह नहीं है और मैंने जो कुछ भी कहा है, वह गोपनीय बातचीत के आधार पर कहा है।’ लावरोव ने कहा कि भारत भी इस बात को समझता है कि कुछ चीजें एक बड़े उकसावे की तरह से हैं।

बता दें कि साल 2020 में गलवान हिंसा के बाद से भारत, चीन और रूस के नेताओं की होने वाली बैठकें बंद हो गई हैं। इससे पहले अक्‍टूबर 2024 में पीएम मोदी और चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रूस के कजान शहर में ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। इससे उम्‍मीद थी कि दोनों देशों के बीच रिश्‍तों में जमी बर्फ पिघल सकती है लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। चीन ने पाकिस्‍तान को हथियार दिए हैं और साथ ही ऐलान किया है कि वह उसकी संप्रभुता की रक्षा करेगा। यही नहीं चीन अपना पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट भी पाक‍िस्‍तान को 50 प्रतिशत कम रेट में देने जा रहा है। वहीं अरुणाचल में चीन ने कई जगहों के नाम बदले हैं। इस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। चीन ऐप्‍पल कंपनी को भी भारत में निवेश से रोक रहा है। इसको लेकर भी तनाव है।

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