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गौतम गंभीर की कोचिंग में टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया की हालत ख़राब लगातार हार से बढ़ी चिंता, क्या है वजह

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गौतम गंभीर की कोचिंग में टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया की हालत ख़राब! लगातार हार से बढ़ी चिंता, क्या है वजह?,टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया की हालत बद से बदतर होती जा रही है. जब से गौतम गंभीर हेड कोच बने हैं, भारतीय टीम टेस्ट में सिर्फ़ बांग्लादेश को ही हरा पाई है. टेस्ट के इतिहास में पहली बार, भारतीय टीम को न्यूज़ीलैंड के अपने ही घर में 3-0 से करारी हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद, ऑस्ट्रेलिया में खेली गई बॉर्डर-गावस्कर सीरीज़ में भी टीम की हालत ख़राब रही और लगातार तीसरी बार ट्रॉफी जीतने का सपना अधूरा रह गया.

रोहित और कोहली के बाद गिल की कप्तानी में भी संघर्ष जारी

रोहित और कोहली के संन्यास के बाद, शुभमन गिल को नया टेस्ट कप्तान बनाया गया. इंग्लैंड में खेली जा रही पाँच मैचों की टेस्ट सीरीज़ में टीम इंडिया 1-2 से पीछे चल रही है.1 यानी, गंभीर की देखरेख में क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप में भारतीय टीम की स्थिति बिगड़ती जा रही है.

टीम मैनेजमेंट के फैसले भी साबित हुए ग़लत

इंग्लैंड दौरे पर सात साल बाद करुण नायर को टेस्ट टीम में वापस लाया गया, लेकिन टीम मैनेजमेंट का यह फ़ैसला भी पूरी तरह से गलत साबित हुआ. नायर बल्ले से कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाए. इसके अलावा, प्रसिद्ध कृष्णा को इंग्लैंड ले जाना भी टीम इंडिया को काफी भारी पड़ा है. कृष्णा अपनी गेंदबाज़ी से कोई ख़ास प्रभाव नहीं डाल पाए और टीम को अहम मौकों पर विकेट नहीं मिल पाए.

क्या है लगातार हार की वजह?

टीम इंडिया की इस लगातार हार के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. एक तो वरिष्ठ खिलाड़ियों के संन्यास के बाद नए कप्तान और युवा खिलाड़ियों को अभी तालमेल बिठाने में समय लग रहा है. दूसरा, गौतम गंभीर की कोचिंग रणनीति शायद टेस्ट क्रिकेट के लिए अभी तक उतनी प्रभावी साबित नहीं हुई है जितनी वाइट-बॉल क्रिकेट में होती है. विदेशी पिचों पर अनुकूलन और सही टीम कॉम्बिनेशन का चुनाव भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.

यह भी पढ़िए: बीएचईएल हरिद्वार ने डिस्पैच किया 800 मेगावाट सुपर क्रिटिकल जनरेटर स्टेटर

आगे की राह: सुधार की है ज़रूरत

टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम को अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए बड़े बदलावों और गहन आत्ममंथन की ज़रूरत है. कोच, कप्तान और चयनकर्ताओं को मिलकर ऐसी रणनीति बनानी होगी जिससे टीम न सिर्फ़ घरेलू मैदान पर बल्कि विदेशी ज़मीं पर भी दमदार प्रदर्शन कर सके. खिलाड़ियों को लंबी पारियाँ खेलने और दबाव में प्रदर्शन करने के लिए और मज़बूत बनाना होगा.

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