अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है.1 अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर दबाव बनाने के लिए यह अतिरिक्त टैरिफ लगाया था. इस टैरिफ के बाद भी, प्रधानमंत्री मोदी के चीन में चल रहे SCO समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री का एक बड़ा बयान सामने आया है.
अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान
अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का एक बयान साझा किया है. इस बयान में कहा गया है कि, “संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है. यह 21वीं सदी का एक निर्णायक संबंध है. इस महीने हम उस प्रगति और संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं जो हमें आगे बढ़ा रही हैं. नवाचार और उद्यमिता से लेकर रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों तक, यह हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच की स्थायी दोस्ती है जो इस यात्रा को ऊर्जा देती है.” इसके साथ ही, #USIndiaFWDforOurPeople का हिस्सा बनने का आह्वान भी किया गया है.
क्या है इस बयान के पीछे की वजह?
अमेरिकी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन पहुंचे हैं. वहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की है. एक तरफ अमेरिका और भारत के संबंध 50% टैरिफ के कारण खराब हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत चीन और रूस के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है, जो अमेरिका के लिए चिंता का विषय हो सकता है.
यह भी पढ़िए: जवाहर लाल नेहरू स्कूल से निकली साईकिल रैली
विरोधाभासी बयान
एक तरफ कई अमेरिकी अधिकारी भारत के खिलाफ उकसावे भरे और विरोधी बयान दे रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ खुद ट्रम्प प्रधानमंत्री की तारीफ भी करते हैं और साथ ही भारत पर 50% टैरिफ लगाने की वकालत भी करते हैं. एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि ट्रम्प ने सिर्फ चिढ़ के कारण भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया था, जिससे कुल 50% टैरिफ हो गया है.
