भोपाल।
शहर में नो-मैपिंग मतदाताओं के मामलों की सुनवाई के लिए जिला प्रशासन ने 85 कोर्ट गठित किए हैं। प्रत्येक वार्ड कार्यालय को सुनवाई केंद्र बनाया गया है, जहां प्रतिदिन दो-दो घंटे सुनवाई की जा रही है। मतदाता आवश्यक दस्तावेज लेकर पहुंच रहे हैं और अपनी नागरिकता व मतदाता अधिकारों से जुड़े मामले रख रहे हैं। पहले दिन 4 हजार से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन इनमें से 2 हजार से कम मतदाता ही सुनवाई में उपस्थित हुए। प्रत्येक सुनवाई अधिकारी को औसतन 50 मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला प्रशासन के अनुसार, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दूसरे चरण में नो-मैपिंग वाले 1 लाख 16 हजार 925 मतदाताओं को नोटिस देने की प्रक्रिया जारी है। अब तक 6 हजार 221 मतदाताओं को नोटिस डिलीवर किए जा चुके हैं, जबकि 2 हजार 830 मतदाताओं के दस्तावेज अपलोड किए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जो मतदाता निर्धारित समय पर दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे, उन्हें दो और अवसर दिए जाएंगे। दस्तावेज न लाने वालों को दूसरा मौका वार्ड-78 में एईआरओ धर्मेंद्र अग्रवाल ने 13 मामलों की सुनवाई की। एक महिला ने बताया कि वह मूल रूप से बंगाल की निवासी है और दस्तावेज मंगवाने के लिए समय चाहिए। वहीं करोंद निवासी एक महिला ने कहा कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम नहीं था। दोनों को दूसरा अवसर दिया गया। कई मतदाताओं ने पहले ही दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर दिए थे, इसलिए वे सुनवाई में नहीं पहुंचे। पड़ोसी का नाम सूची में, हमारे नाम कटे ईदगाह हिल्स निवासी राजू दलाल ने बताया कि उनके पड़ोसी का नाम मतदाता सूची में है, जबकि उनके परिवार के नाम काट दिए गए हैं। वे 1999 से क्षेत्र में रह रहे हैं। अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेज जमा कर लिए हैं।
