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ऐतिहासिक धरोहरों के अध्ययन से खुलेंगे युवाओं के लिए रोजगार के द्वार—पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास — भेल कॉलेज  के वार्षिक स्नेह सम्मेलन ‘विहान’ का भव्य शुभारंभ

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भोपाल

ऐतिहासिक धरोहरों और भारतीय संस्कृति का अध्ययन केवल अतीत को जानना नहीं है, बल्कि यह वर्तमान जीवनशैली में रोजगार के नए अवसरों को तलाशने का सशक्त माध्यम है। पर्यटन और पुरातत्व के क्षेत्र में युवाओं के लिए असीम संभावनाएं मौजूद हैं। ये विचार विश्व प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास ने व्यक्त किए। वे बाबूलाल गौर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय , भोपाल के वार्षिक स्नेह सम्मेलन ‘विहान’ के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

संस्कृति और आधुनिकता का संगम: डॉ. व्यास डॉ. व्यास ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश इस बात का प्रमाण है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के अध्ययन से हम अपनी परंपराओं को निकट से जान सकते हैं और पर्यटन क्षेत्र में करियर बनाकर आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार कर सकते हैं। अवसाद का सामना उत्साह से करें युवा: डॉ. राहुल जैन समारोह के विशेष अतिथि डॉ. राहुल जैन ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन की असफलताओं का डटकर सामना करने का आह्वान किया और उन्हें ‘कभी आत्महत्या न करने’ की शपथ दिलाई।

उल्लेखनीय है कि डॉ. जैन अब तक 100 से अधिक देशों में 10 लाख से अधिक लोगों को यह संकल्प दिला चुके हैं। उन्होंने ‘स्वस्थ भारत – समृद्ध भारत’ का नारा देते हुए योग और ध्यान को जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर जोर दिया। संस्था के लिए गौरव का क्षण: प्राचार्य महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय जैन ने पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास का शाल, श्रीफल और स्मृति चिह्न (पौधा) प्रदान कर सम्मान किया। डॉ. जैन ने कहा कि महाविद्यालय में संचालित पर्यटन और होटल प्रबंधन पाठ्यक्रमों को डॉ. व्यास का निरंतर मार्गदर्शन मिलता रहा है।

उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जाना पूरे महाविद्यालय परिवार के लिए गौरव की बात है। विविध प्रतियोगिताओं में झलकी प्रतिभा छात्रसंघ प्रभारी डॉ. अनुपमा यादव ने बताया कि सम्मेलन के पहले दिन विद्यार्थियों ने भारी उत्साह दिखाया। ‘विहान’ के अंतर्गत निम्नलिखित प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन हुआ कला रंगोली और द्वार सज्जा प्रतियोगिता। परिधान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और प्राचीन भारतीय संत परिधान प्रतियोगिता। सांस्कृतिक युगल गायन, अभिप्रेरक स्पीच और अंत्याक्षरी। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. वर्षा चौहान ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं  मौजूद रहे।

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