बीएचईएल के नेताओं के कई मामले यूं तो चर्चाओं में रहते ही हैं लेकिन इस बार एक बड़ी यूनियन के नेता खासी चर्चाओं में आ गये । मामूली आर्टीजन से नेता बनें इस नेता के एक नहीं कई मामले कर्मचारियों के बीच सुने जा रहे हैं दरअसल जब इस नेता का अध्यक्ष पद खतरे में पड़ गया तो कुछ बल्लमों ने इस नेता की पोल खोलना शुरू कर दी । कई गुप्त मामले लेकर इधर—उधर शिकायत करने से नहीं चूक रहे लेकिन एक मंत्री का बरदहस्त इन्हें बचाये हुये है । चर्चा है कि अपने राजनैतिक कार्यकाल में बीएचईई थ्रिफ्ट सोसायटी की तर्ज पर एक अलग ही सोसायटी बना डाली जिसमें बीएचईएल के कई कर्मचारी नेता जी के प्रभाव के चलते बेंम्बर बन गये । बड़ी बात यह है कि पिछले 25 सालों से नेता जी स्वंय शंभू अध्यक्ष बनें हुये हैं कोई आवाज उठाता नहीं ।
नेता जी कागजों में आज भी नियम विरूद्ध अध्यक्ष बनें हुये । चर्चा है कि 600 सदस्यों वाली इस संस्था के सदस्य जब हिसाब किताब मांगते हैं तो नेता जी उनसे अपना हिसाब करने की बात करने लगते हैं । एक सदस्य ने यह तक कह डाला कि करीब 2 करोड़ की सोसायटी का सालाना व्यय सदस्यों से 8 फीसदी लोन पर लिया जाता है और संस्था को करीब 30 से 32 लाख दो साल में ब्याज मिलता है लेकिन नेता जी सदस्यों को डिबीडेंट तक नहीं बांटते। अब संस्था की अलग से बात करें तो कर्मचारियों के अलावा नेता जी एक ही परिवार के दो—दो व तीन—तीन मेंम्बर बना डाले । रहा नेता जी के अध्यक्ष पद और गेट पास का मामला तो वह भी खतरें में दिखाई दे रहा है । भेल के प्रशासनिक भवन में इस बात की चर्चा है कि इस यूनियन के सैंट्रल लीडर ने बीएचईएल की स्थानीय प्रबंधन को दूरभाष पर साफ कह दिया है कि नेता जी का गेट पास अब नहीं बनेंगा । यह बात नेता जी का मालूम या नहीं यह तो वहीं जाने । सब मिलाकर धीरे—धीरे रिटायर नेताओं को अब अलविदा कहा जा रहा है ।
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