भोपाल
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 8 हजार जूनियर डॉक्टरों के लिए बड़ी खुशखबरी है। मानदेय (स्टाइपेंड) में संशोधन की मांग को लेकर की गई हड़ताल के बाद, राज्य सरकार ने स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। यह वृद्धि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स 2.94 के आधार पर की गई है, जो 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगी। उपमुख्यमंत्री ने बताया ‘स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम कड़ी’ उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने आदेश जारी होने पर कहा कि जूनियर डॉक्टर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। वे न केवल पढ़ाई करते हैं, बल्कि अस्पतालों में मरीजों की सेवा में भी चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। सरकार चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और डॉक्टरों की सुविधाओं के लिए प्रतिबद्ध है। हड़ताल के दबाव में झुकी सरकार उल्लेखनीय है कि स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर प्रदेशभर के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) ने मोर्चा खोल रखा था।
6 से 9 मार्च तक काली पट्टी बांधकर विरोध करने के बाद, 9 मार्च को डॉक्टरों ने पूर्ण हड़ताल कर दी थी। इस दौरान भोपाल के हमीदिया अस्पताल सहित प्रदेश के कई बड़े अस्पतालों में ओपीडी और सर्जरी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। अकेले हमीदिया में 20 से अधिक ऑपरेशन टालने पड़े थे। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं जारी रखी गई थीं।
16 मार्च तक स्थगित थी हड़ताल 9 मार्च की शाम को उप मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा आयुक्त के साथ हुई सकारात्मक चर्चा के बाद डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल 16 मार्च तक के लिए टाल दी थी। सरकार द्वारा समय रहते आदेश जारी करने से अब चिकित्सा संस्थानों में काम सुचारू रूप से चलने की उम्मीद है।
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