भोपाल
शहर के कैलाशनाथ काटजू अस्पताल में एक नवजात शिशु की मौत के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रसूता के परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। आक्रोश इतना अधिक था कि महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को सुरक्षा के लिए खुद को कमरों में बंद करना पड़ा। सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया।
पहली डिलीवरी में बरती गई लापरवाही: परिजन
परिजनों के अनुसार, संजना रैकवार को नौ माह की गर्भावस्था के बाद शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार शाम करीब 5 बजे प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उन्हें लेबर रूम ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि सामान्य डिलीवरी की प्रक्रिया के दौरान बच्चा आधा बाहर आ चुका था, लेकिन ऐन वक्त पर स्थिति बिगड़ने की बात कहकर डॉक्टरों ने प्रसूता को ऑपरेशन थियेटर (OT) में शिफ्ट कर दिया। कुछ देर बाद परिजनों को सूचना दी गई कि बच्चा मृत पैदा हुआ है।
एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रसव के महत्वपूर्ण समय पर अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ (Anesthesia Specialist) मौजूद नहीं था। इसी वजह से ऑपरेशन शुरू करने में देरी हुई और गर्भ के अंदर ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। परिजनों का सवाल है कि जब स्थिति सामान्य थी, तो अंतिम क्षणों में जटिलता कैसे पैदा हुई।
चिकित्सीय जटिलता का हवाला: अस्पताल प्रबंधन
दूसरी ओर, अस्पताल इंचार्ज डॉ. रचना दुबे ने लापरवाही के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह एक अत्यंत जटिल चिकित्सीय स्थिति थी। उनके अनुसार, “प्रसव के दौरान अचानक बच्चे का रोटेशन रुक गया था, जिससे सिर नीचे आने की प्रक्रिया बाधित हो गई। ऐसी गंभीर स्थिति में जान बचाने के लिए अंतिम समय में सिजेरियन (ऑपरेशन) का निर्णय लिया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश बच्चा मृत अवस्था में ही पैदा हुआ।”
