भोपाल। मध्य प्रदेश में शुद्ध के लिए युद्ध के दावों के बीच मिलावटखोरी का एक खौफनाक चेहरा सामने आया है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश की थाली में परोसे जा रहे जहर की पुष्टि कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश भर में लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों में से 2000 से ज्यादा सैंपल फेल पाए गए हैं। सबसे चौंकाने वाली स्थिति ग्वालियर की है, जहाँ सर्वाधिक 420 मामले सामने आए हैं।
मोबाइल वैन की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
एफडीए द्वारा पहली बार मोबाइल वैन के माध्यम से लिए गए करीब एक लाख नमूनों की कंपाइल रिपोर्ट तैयार की गई है। पिछले तीन वर्षों के इन आंकड़ों से पता चलता है कि मिलावटखोर सबसे ज्यादा उन चीजों को निशाना बना रहे हैं, जिनका उपयोग हर घर में रोज होता है। दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी उत्पादों में सबसे अधिक मिलावट पाई गई है। मिलावट का यह खेल अब केवल प्रशासनिक शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन केवल तात्कालिक फूड पॉइजनिंग तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक इनका सेवन डायबिटीज, हृदय रोग और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है। हाल ही में राजधानी में 23 वर्षीय राहुल शर्मा का मामला इसका उदाहरण है, जिन्हें बाहर का खाना खाने के बाद गंभीर फूड पॉइजनिंग के चलते चार दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
डेयरी प्रोडक्ट में सबसे ज्यादा जोखिम
जांच में सामने आया है कि दूध में यूरिया और डिटर्जेंट, जबकि घी और मावे में हानिकारक फैट की मिलावट की जा रही है। FDA की मोबाइल वैन ने मौके पर ही जब इन नमूनों की जांच की, तो दूध और पनीर के सैंपल मानक स्तर से काफी नीचे पाए गए। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन फिलहाल आम जनता के लिए अपनी रसोई में पहुंचने वाली चीजों की शुद्धता पहचानना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
