भोपाल। राजधानी की जीवनरेखा कहे जाने वाले ‘छोटा तालाब’ के सिमटते आकार और बढ़ते प्रदूषण पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। तालाब क्षेत्र में लगातार हो रहे अतिक्रमण, मलबा डालने और सीवेज मिलने की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए ट्रिब्यूनल ने भोपाल कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नर, राज्य एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। याचिकाकर्ता राशिद नूर खान द्वारा पेश किए गए फोटोग्राफ्स और साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि अवैध गतिविधियों के कारण झील का जल फैलाव क्षेत्र लगातार घट रहा है, जो शहर के पारिस्थितिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा है।
ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश किए पुख्ता सबूत
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील हर्षवर्धन तिवारी ने ट्रिब्यूनल के समक्ष पुख्ता सबूत पेश किए। फोटोग्राफ्स के जरिए दिखाया गया कि शहर के विभिन्न नालों और पाइपों के माध्यम से अनुपचारित (Un-treated) सीवेज सीधे छोटे तालाब में छोड़ा जा रहा है। इस दूषित पानी की वजह से झील में ‘यूट्रोफिकेशन’ (पोषक तत्वों की अत्यधिक वृद्धि) की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे पानी में ऑक्सीजन की कमी हो रही है और जलीय जीवन संकट में है। इसके अतिरिक्त, तालाब के किनारों पर प्लास्टिक कचरा, घरेलू अपशिष्ट और निर्माण कार्यों का मलबा बड़ी मात्रा में जमा हो गया है, जो झील की जल धारण क्षमता को कम कर रहा है।
याचिका में केवल जल प्रदूषण ही नहीं, बल्कि तालाब के आसपास के हरित क्षेत्र (Green Area) को पहुंच रहे नुकसान का भी जिक्र किया गया है। साक्ष्यों में दिखाया गया है कि तालाब के कैचमेंट एरिया में पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है। कई स्थानों पर सूखे पेड़ और कटे हुए ठूंठ दिखाई दे रहे हैं, जो सीधे तौर पर पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है। पेड़ों की कमी के कारण मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है, जिससे झील में गाद जमा होने की समस्या पैदा हो रही है। एनजीटी ने इन सभी गंभीर पहलुओं पर संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि छोटे तालाब के संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाए जा सकें।
