भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के आदेश ने तूल पकड़ लिया है। इस आदेश के विरोध में बुधवार को प्रदेशभर के शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर राजधानी भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई।
अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की गलत व्याख्या कर यह आदेश थोपा गया है। शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश के लगभग 1.5 लाख शिक्षक इस आदेश से प्रभावित होंगे, जिनमें से 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं जिनकी नियुक्ति वर्ष 2011 से पहले हुई थी। शिक्षकों का तर्क है कि जब आरटीई एक्ट (2009) और टीईटी (2011) लागू होने से पहले ही उनकी नियुक्ति हो चुकी थी, तो अब उन पर यह शर्त लागू करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
हाल ही में जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक का समय शेष है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर उनकी सेवा समाप्ति तक की बात कही गई है। शिक्षकों ने इसे ‘रेट्रोस्पेक्टिव’ (पुरानी नियुक्तियों पर नए नियम) फैसला बताते हुए इसे कानूनी रूप से भी गलत करार दिया है।
