भोपाल। राजधानी के टीटी नगर स्थित अपेक्स बैंक शाखा के साथ हुई धोखाधड़ी का एक पुराना और पेचीदा मामला अब आपराधिक जांच के दायरे में आ गया है। वर्ष 2002 में तथ्यों को छिपाकर लिए गए लाखों रुपए के लोन के मामले में बैंक प्रबंधन की शिकायत पर टीटी नगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में मुख्य आरोपी और गारंटर पर बैंक को गुमराह करने और धोखाधड़ी के साक्ष्य मिले हैं।
जांच के अनुसार, वर्ष 2002 में डीके भुवन आचार्य ने अपेक्स बैंक से 6 लाख रुपए का प्रोजेक्ट लोन और 3 लाख रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट ली थी। इस ऋण के लिए वी. रामचंद्र राजू गारंटर बने थे और उन्होंने भोपाल के इंद्रपुरी सेक्टर-सी स्थित अपना 3800 वर्गफीट का प्लॉट बैंक के पास गिरवी रखा था। राजू ने बैंक को शपथ-पत्र भी दिया था कि यह संपत्ति पूरी तरह भारमुक्त है और कहीं और गिरवी नहीं है। अपेक्स बैंक के प्रबंधक डीके चंदेल के अनुसार, दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि बैंक को शुरुआत से ही अंधेरे में रखा गया था। जिस प्लॉट को बैंक के पास गिरवी रखा गया था, उसका 900 वर्गफीट हिस्सा 30 मार्च 1996 को ही बेचा जा चुका था। यानी बैंक को गिरवी रखते समय संपत्ति का वास्तविक आकार और स्थिति गलत बताई गई थी।
लोन लेने के बाद आचार्य ने केवल चार किस्तें (लगभग 1.80 लाख रुपए) जमा कीं और सितंबर 2004 से भुगतान बंद कर दिया। जब बैंक ने 2005 में वसूली की कार्रवाई शुरू की, तो मामला और उलझ गया। 2008 में गोविंदपुरा तहसीलदार ने संपत्ति की नीलामी से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह प्लॉट पहले ही यूनियन बैंक के एक मामले में नीलाम हो चुका है। इसके बाद 2006 में कुंती साहू नामक महिला ने इस प्लॉट को संजय साहू से खरीदने का दावा पेश कर दिया।
