भोपाल। राजधानी में गर्मी का पारा चढ़ते ही पेयजल की किल्लत ने विकराल रूप धारण कर लिया है। शहर के कई इलाकों, विशेषकर झुग्गी बस्तियों में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। स्थिति यह है कि लोगों को दैनिक कार्यों के लिए भी पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है और नगर निगम की टैंकर व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है।
शहर की निचली बस्तियों में जल संकट का सबसे भयावह चेहरा सामने आया है। यहाँ नगर निगम के टैंकर एक दिन छोड़कर पहुँच रहे हैं और उनके आने का कोई निश्चित समय नहीं है। भीषण गर्मी और तपती दोपहर में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे घंटों बर्तन लेकर टैंकरों का इंतजार करने को मजबूर हैं। कई बार घंटों लाइन में लगने के बावजूद कई परिवारों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। बस्तियों में लगे अधिकांश सार्वजनिक बोरिंग सूख चुके हैं या तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं।
इसके चलते पूरी आबादी अब केवल टैंकरों के भरोसे है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि चुनाव के समय बड़े वादे करते हैं, लेकिन अब कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं है। शिकायतों के बाद भी समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है। मौसम विभाग द्वारा ‘वॉर्म नाइट’ और बढ़ते तापमान के अलर्ट के बीच पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है। यदि नगर निगम ने जलापूर्ति की व्यवस्था में तुरंत सुधार नहीं किया, तो मई और जून के महीनों में स्थिति बेकाबू हो सकती है। वर्तमान में शहर के कई अन्य हिस्सों से भी कम दबाव (लो-वोल्टेज) और अनियमित सप्लाई की शिकायतें आ रही हैं, जिससे आमजन में भारी आक्रोश व्याप्त है।
