भोपाल। राजधानी में संपत्ति के नामांतरण को लेकर जिला प्रशासन ने नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब शहर में नामांतरण कराने के लिए एमओयू (MoU), अनुबंध या पार्टनरशिप जैसे दस्तावेजों को कानूनी आधार नहीं माना जाएगा। प्रशासन ने सभी तहसील कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल वैध और निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर ही नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाए।
दरअसल, पिछले कुछ समय से तहसील कार्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन आ रहे थे, जिनमें रजिस्टर्ड डीड के बजाय अन्य दस्तावेजों का सहारा लिया जा रहा था। इसे देखते हुए प्रशासन ने भू-राजस्व संहिता 1959 के नियमों को स्पष्ट कर दिया है। अब नामांतरण के लिए केवल खरीद-बिक्री की रजिस्टर्ड डीड, विरासत, गिफ्ट डीड, वसीयत, विधिवत बंटवारा, कोर्ट ऑर्डर, पट्टा या अधिकार पत्र जैसे दस्तावेज ही मान्य होंगे। प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कई मामलों में कंपनियों के मर्जर एग्रीमेंट के आधार पर नामांतरण के आवेदन दिए जा रहे थे। नजूल क्षेत्रों में ऐसे 100 से अधिक मामले वर्तमान में लंबित हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कंपनी के मर्जर होने पर उसका संचालन तो जारी रहता है, लेकिन संपत्ति का स्वामित्व स्वतः स्थानांतरित नहीं होता। अन्य राज्यों के हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देकर किए जा रहे ऐसे आवेदनों को प्रशासन ने अमान्य घोषित कर दिया है। प्रशासन के मुताबिक, नामांतरण की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब बिना वैध रजिस्ट्री या सक्षम दस्तावेज के कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस फैसले से उन मामलों पर लगाम लगेगी जहाँ कच्चे दस्तावेजों या आपसी समझौतों के जरिए मालिकाना हक जताने की कोशिश की जाती थी।
