भोपाल। राजधानी के जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल और कोटरा सुल्तानाबाद स्थित बीएस एचपी गैस एजेंसी में खाद्य विभाग की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच रिपोर्ट में 10 तरह की गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिसमें सुरक्षा जांच के नाम पर उपभोक्ताओं से 10 लाख रुपए की अवैध वसूली और हजारों सिलेंडरों का हेरफेर शामिल है। खाद्य विभाग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंप दी है, जिसके आधार पर अब एजेंसियों के लाइसेंस निरस्त करने और संचालकों पर एफआईआर की तैयारी की जा रही है।
जांच में सामने आया है कि इन विवादित एजेंसियों का संचालन खाद्य विभाग के ही रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी बीपी शर्मा और उनके रिश्तेदारों द्वारा किया जा रहा था। नीलबड़ स्थित करीब 36 हजार वर्गफीट के साझा गोदाम में दोनों एजेंसियां संचालित हो रही थीं। स्टॉक की भौतिक जांच में फीनिक्स एजेंसी से 350 घरेलू, 350 कमर्शियल और 2005 छोटे (छोटू) सिलेंडर गायब मिले। वहीं, बीएस एजेंसी के गोदाम से भी 254 भरे हुए सिलेंडर नदारद थे। फर्जी सुरक्षा शुल्क: एजेंसी ने घर जाकर निरीक्षण किए बिना ही ‘मेंटेटरी इंस्पेक्शन’ के नाम पर 5000 उपभोक्ताओं से 238-238 रुपए वसूल लिए।
इस तरह करीब 10 लाख रुपए की अवैध वसूली उजागर हुई है। उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी देने के बजाय एजेंसी के पीछे खड़े ट्रकों से सिलेंडर बांटे गए। नियमतः प्रति सिलेंडर 34 रुपए कम लेने चाहिए थे, लेकिन एजेंसी ने पूरे 918 रुपए वसूले। अनुमान है कि हर महीने करीब 2 लाख रुपए की अवैध कमाई ‘कैश एंड कैरी’ के जरिए की गई। उपभोक्ताओं ने सिलेंडर बुक किए, उनके मोबाइल पर ‘डिलीवर्ड’ के मैसेज भी पहुंच गए, लेकिन असल में उन्हें गैस नहीं मिली। जांच में पाया गया कि ये सिलेंडर बाजार में ऊंचे दामों पर अन्य जगहों पर बेच दिए गए।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल से अब तक करीब 2000 ऑनलाइन बुकिंग लंबित पाई गईं। यही नहीं, गैस डिपो से निकलने वाले ट्रक 2 घंटे के सफर को 24 घंटे में तय कर रहे थे, जिससे अवैध रिफिलिंग की आशंका गहरा गई है। खाद्य नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन की टीम द्वारा सौंपी गई इस रिपोर्ट के बाद, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुमोदन पर संबंधित गैस कंपनियों को लाइसेंस रद्द करने का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। अवैध परिवहन और रिफिलिंग के 10 से 12 अन्य मामलों में भी सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
