भोपाल। राजधानी के जवाहर चौक स्थित डॉ. अभिजीत देशमुख के सभागार में ‘अभिव्यक्ति विचार यात्रा’ श्रृंखला के अंतर्गत एक बौद्धिक विमर्श कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। ‘प्रगतिशील युवा भारत और पीछे छूटते बागवान: जिम्मेदारी, संवेदना और समाधान’ विषय पर आयोजित इस विचार गोष्ठी में विशेषज्ञों ने नई पीढ़ी और बुजुर्गों के बीच समन्वय पर जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सहारा वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत देशमुख ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि एक संवेदनशील समाज ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करता है। डॉ. देशमुख ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने बुजुर्गों के अनुभवों से सीख लेकर समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवा शक्ति का जोश और टेक्नोलॉजी जब बुजुर्गों के अनुभव के साथ मिलकर काम करेंगे, तभी देश वास्तव में समृद्ध होगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ. नवीन आनंद जोशी थे। उन्होंने विषय को वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में पारिवारिक मूल्यों का क्षरण एक गंभीर चुनौती बन गया है। मुख्य वक्ता साहित्यकार गोकुल सोनी ने अपने वक्तव्य में कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इस विकास यात्रा में बुजुर्गों के अनुभव और मार्गदर्शन की उपेक्षा नहीं की जा सकती।
उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता पर बल दिया जहाँ बुजुर्ग सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन व्यतीत कर सकें। कार्यक्रम का सफल संचालन संयोजक मनोज जैन द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
