भोपाल। पिछले साल राजधानी के एक स्लॉटर हाउस से पकड़े गए 24 टन गोमांस के मामले में अब राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व पार्षद अमित शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज दस्तावेज पेश करते हुए भोपाल नगर निगम की महापौर और मेयर इन काउंसिल (MIC) पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शर्मा का दावा है कि इस पूरे खेल में ‘असलम चमड़ा’ तो महज एक मोहरा था, जबकि असली गुनाहगार वे जिम्मेदार हैं जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर स्लॉटर हाउस को 20 साल की अनुमति दी। अमित शर्मा ने नगर निगम के दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि एमआईसी (MIC) द्वारा महज 6 महीने के लिए एक अस्थाई प्रस्ताव लाया गया था। लेकिन अंदरुनी फाइलों में अधिकारियों और एमआईसी सदस्यों ने सांठगांठ कर इसे 20 वर्षों के लिए अनुमोदित कर दिया। कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जब इसी स्लॉटर हाउस में 24 टन गोमांस मिला और गौमाता की हत्या की पुष्टि हुई, तो अनुमति देने वाले महापौर और एमआईसी कांग्रेस ने सरकार और पुलिस पर मुख्य आरोपी असलम चमड़ा को बचाने का भी आरोप लगाया।
अमित शर्मा ने कहा कि पुलिस ने केस को इतना कमजोर बनाया कि असलम को आसानी से कोर्ट से जमानत मिल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में केवल खानापूर्ति की गई है और उन अधिकारियों के नाम एफआईआर से गायब हैं जिन्होंने टेंडर और अनुमति की फाइलों पर दस्तखत किए थे। यह न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार है बल्कि ‘सनातन धर्म’ और ‘गौमाता’ का अपमान भी है। कांग्रेस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में यह भी दावा किया गया है कि स्लॉटर हाउस के निर्माण कार्य में देरी होने पर पहले भारी पेनाल्टी (जुर्माना) लगाई गई थी। लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव और साठगांठ के चलते उस पेनाल्टी को भी माफ कर दिया गया। शर्मा ने मांग की है कि जांच का दायरा बढ़ाकर उन सभी पर एफआईआर दर्ज की जाए जिनके हस्ताक्षर अनुमति पत्र पर मौजूद हैं।
